कोरोना ने मां-बेटे में बना दी दूरी,शव लेने से इंकार के बाद नहीं लिया अंतिम संस्कार में भाग

Edited By swetha,Updated: 07 Apr, 2020 09:31 AM

last riots of woman

कोरोना वायरस का डर कहो या कलयुग का प्रभाव जिस मां ने जन्म दिया, उस की लाश को लेने से इंकार करने से लेकर अंतिम रस्मों में परिवार ने भाग लेने से इंकार कर दिया

लुधियानाः कोरोना का डर कहें या कलयुग का प्रभाव जिस मां ने जन्म दिया, उसकी लाश को लेने से बेटे ने इंकार कर दिया। पूरा परिवार शमशानघाट के बाहर अपनी गाड़ी में बैठा रहा। संस्कार की सारी प्रक्रिया निभाने में प्रशासनिक आधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई। इस घटना से दुखी ए.डी.सी. इकबाल सिंह संधू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालकर दुख और गुस्सा जाहिर करते कहा कि जिस मां ने जन्म दिया, उसके संस्कार से दूरी बनाना बेहद शर्मसार करने वाली घटना है।

श्री संधु ने बताया कि कोरोना पीड़ित शिमलापुरी निवासी महिला की गत दिवस उपचार दौरान मौत हो गई थी। जब इसकी सूचना मृतका के परिवार को दी गई तो पहले तो उन्होंने शव लेने से ही मना कर दिया, जिस पर तहसीलदार जगसीर सिंह और दूसरे पुलिस आधिकारियों ने इस प्रक्रिया को पूरा किया। इसके बाद भी परिवार को यह समझाने का यत्न किया गया कि प्रशासन के पास सभी जरूरी बचाव के प्रबंध हैं, परन्तु उन्होंने कंधा देना तो दूर अंतिम क्रिया से भाग लेने से इंकार कर दिया। परिवार संस्कार  के दौरान शमशानघाट से बाहर अपनी कार में ही बैठे रहा। इस दौरान प्रशासन ने ही ससकार की सारी प्रक्रिया पूरी की।

श्री संधु ने कहा कि जिस परिवार और बच्चों को पालन में मां ने सारी जिंदगी लगा दी, आखिरी समय उसे कंधा तक नसीब नहीं हुआ। ऐसे समय जब महिला का संस्कार उनकी तरफ से किया गया है तो उनकी आत्मा की शान्ति के लिए अखंड पाठ साहिब रखवाने की जिम्मेदारीउन्होंने एस. डी. एम. अमरेंद्र सिंह को गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह में करवाने का सौंपी है। इस घटना के साथ प्रशासन का भी एक अलग चेहरा आम जनता के सामने आया है, जिसकी चारों तरफ प्रशंसा की जा रही है। ए. डी. सी. संधू ने लोगों से अपील की है कि ऐसे समय में रिश्तों के साथ-साथ मानवता को बरकरार रखना सबकी जिम्मेदारी बनती है।

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