हिमाचल में कैंसर खतरे की चेतावनी, चोटी के विशेषज्ञ ने बताई मेन वजह

Edited By Urmila,Updated: 24 Feb, 2026 12:19 PM

himachal pradesh warns of cancer risk

नई दिल्ली में "फ्रेंड्स ऑफ हिमाचल" संस्था  द्वारा हिमाचल में कैंसर के  बढ़ते मामलों पर आयोजित एक सेमिनार में बोलते हुए एसियन कैंसर हॉस्पिटल फरीदाबाद के चेयरमैन डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने कहा।

नई दिल्ली : नई दिल्ली में "फ्रेंड्स ऑफ हिमाचल" संस्था  द्वारा हिमाचल में कैंसर के  बढ़ते मामलों पर आयोजित एक सेमिनार में बोलते हुए एसियन कैंसर हॉस्पिटल फरीदाबाद के चेयरमैन डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने कहा है कि  हिमाचल प्रदेश के  ग्रामीण क्षेत्रों  में ज्यादातर लोग रात्रि में अपने दोस्तों के साथ सूखे रैड मीट का सेवन करते हैं और महफिल जमाने  के लिए  सिगरेट और शराब को जोड़ लेते हैं । यह सब कैंसर फैलने के लिए एक घातक मिश्रण माना जाता है क्योंकि इस मिश्रण में 80 ऐसे केमिकल विद्यमान होते हैं जोकि कैंसर का कारण बनते हैं।

डॉक्टर पुनीत गुप्ता मण्डी के मूल निवासी हैं और देश के  चोटी के कैंसर विशेषज्ञ

हिमाचल प्रदेश के सुदूर दुर्गम पिछड़े क्षेत्रों और राज्य के जन जातीय क्षेत्रों में परम्परागत रूप में सर्दियां शुरू होने से पहले बकरे/भेड़ को काटकर इसका मीट सूखा लिया जाता है और फिर सर्दियों में इस मीट का सेवन किया जाता है।  कई मामलों  में तो विवाह शादियों में बरसों पुराना सूखा रैड मीट परोसा जाता है जिसे पारिवारिक प्रतिष्ठा से भी जोड़ा जाता है। दरअसल मीट सुखाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है लेकिन अब यह मीट कैंसर का मुख्य कारण बन कर सामने आ रहा है ।

डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने  सूखे लाल मीट की बजाय देशी बकरे के आर्गेनिक  ताजे मीट के सेवन का सुझाव दिया। उन्होंने कहा की सूखे रैड मीट की जगह ताजा चिकन या ताजा मछली का सेवन सेहत के लिए बेहतर है और इसके सेवन से कैंसर का कतई खतरा नहीं होता। उन्होने सुझाव दिया की बीयर और व्हिस्की के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है और इसके लिए अगर आप शराब के शौकीन हैं तो रेड वाइन का सेवन करें और रेड वाइन को  बिना पानी मिलाए पिया जाए तो बेहतर होगा क्योंकि ज्यादातर शराबी  घर से बाहर पीते हैं जहां साफ पानी, बर्फ  की उपलब्धता नहीं होती और गन्दा, खराब पानी मिलाने से रेड वाइन के गुण खराब हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि रेड वाइन में लाल रंग रेस्वेररीट्रोल केमिकल की बजह से होता है जो शरीर को कैंसर से प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं ।

कैंसर से बचने के लिए उन्होंने दिन में पांच बार फ्रूट खाने की सलाह दी। उन्होंने कहा की खाने के साथ फ्रूट ले और स्नैक्स मे भी फ्रूट के सेवन को प्राथमिकता दें।  डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने सब्ज़ियों या सलाद को फल के अतिरिक्त  उपयोग  करने की सलाह दी।  उन्होंने रंगीन फ्रूट के सेवन को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया जोकि ताजा उस सीजन के हों।  उन्होंने कहा की रंगीन फलों में विटामिन, खनिज और एंटी ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं जो कि कैंसर से बचाव करते हैं ।

उन्होंने आम,  पपीता, बेर, संतरा, चेरी, स्ट्रॉबेरी, जामुन और अंगूर आदि फलों के सेवन का सुझाव दिया जो उस सीजन में ताजा पैदा होते हों । उन्होंने कहा की रंगदार फलों के सेवन से  कैंसर के इलाबा  मधुमेह , हाइपरटेंशन और दिल की बिमारियों से भी बचा जा  सकता हैं । 

उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने पर कई बार दूध नहीं पचता तो इस समस्या पर शरीर में प्रोटीन की मात्रा बनाये रखने के लिए दाल और सब्ज़ियों के साथ दही और पनीर के सेवन करें। उन्होंने प्रोटीन के लिए दूध दही दाल का सेवन करने की सलाह दी और कहा की एनिमल प्रोटीन की बजाय दूध दही दाल की प्रोटीन सुरक्षित होती है और इससे कैंसर के चांस कम होते हैं । उन्होंने मीट हफ्ते में मात्र दो बार ही लेने की सलाह दी। उन्होंने गाय, भैंस और सूअर के मांस को बिल्कुल न खाने की सलाह भी दी ।

डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने  किसानों और बागवानों को फसलों में कीटनाशक, खाद आदि स्प्रे करती बार पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी।  किसानों और बागवानों को हाथों में दस्ताने और मुंह में मास्क लगा कर ही फसलों में स्प्रे करना चाहिए क्योंकि यह सभी कीटनाशक कैंसर कारक होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान बागवान  मुंह में मास्क लगाए बिना नंगे हाथों से खेतों/बगीचों में नियमित रूप से चार या पांच घंटे खाद का छिड़काब करता है तो उसे पांच सात साल में कैंसर ग्रसित कर सकता है। उन्होंने बगीचों में स्प्रे करते समय मुंह पर मास्क लगाने की सलाह दी ताकि कैंसर और सांस की अन्य बिमारियों से बचा जा सके।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश में खनन की बढ़ती गतिबिधियों को भी कैंसर के केस बढ़ने से जोड़ते हुए कहा की खनन के दौरान उड़ने वाली धूल मिटटी  के कण अगर लगातार शरीर में प्रवेश करते है तो यह कैंसर का कारण वन सकता है इसलिए खनन मजदूरों को कार्यस्थल पर "इंडस्ट्रीयल मास्क" का प्रयोग धुल से बचने के लिए जरूर करना चाहिए।

डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने बताया कि गांवों में  महिलाओं को चूल्हे के धुएं से बचना चाहिए और क्लीन एनर्जी का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा की रुई, ऊन की पिंजाई के दौरान उड़ने बाले कण अगर लगातार शरीर के अन्दर जाते हैं तो यह कैंसर का खतरा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह लोहार/ बढ़ई आदि पेशेवरों को काम करते समय मुंह में मास्क जरूर लगाना चाहिए। उन्होंने बताया की हिमाचल प्रदेश का पर्यावरण सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित है लेकिन कुछ पेशेवरों को काम के समय सावधानी बरतने  की जरूरत है। 

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