Edited By Kalash,Updated: 24 Feb, 2026 10:50 AM

पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा प्रणाली में किए जा रहे नए प्रयोग अब विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए जी का जंजाल बनते जा रहे हैं।
हाजीपुर (जोशी): पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा प्रणाली में किए जा रहे नए प्रयोग अब विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए जी का जंजाल बनते जा रहे हैं। एक तरफ जहां स्कूलों में बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा अध्यापकों के लिए 15 मार्च को रखी गई टैट की परीक्षा चर्चा और विरोध का विषय बन गई है।
अध्यापकों के सिर पर एक साथ तीन जिम्मेदारियां हैं एक बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं दूसरा अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए टेस्ट की तैयारी तथा तीसरा वोटों सूचियों की जांच में बी.एल.ओ. की ड्यूटियां। अभिभावकों का आरोप है कि जिस समय अध्यापकों को बच्चों की रिविजन करवानी चाहिए थी, उस समय वे अपनी किताबें टटोलने के लिए मजबूर हैं। लगातार हो रहे विरोध के बावजूद सरकार अपने टैट के नोटिफिकेशन को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है, जिसे अध्यापकों ने सरकार द्वारा अपने रास्ते में कांटे बिछाने के बराबर बताया है।
गुस्से में आए अभिभावकों ने सीधा सवाल उठाया है कि क्या सरकार जानबूझकर ऐसे हालात पैदा कर रही है कि लोग सरकारी स्कूलों से अपना मोह भंग कर लें। उनके अनुसार, यदि यह टेस्ट बच्चों की परीक्षाओं के बाद लिया जाता, तो किसी का कोई नुकसान नहीं होता। सरकार ने जानबूझकर बच्चों के जीवन और शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया है। अध्यापकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार के इस फैसले से शिक्षा का स्तर ऊंचा होने के बजाय गिर रहा है। यदि सरकार ने जल्द ही अपना अड़ियल रवैया नहीं त्यागा, तो इसका खामियाजा आने वाले विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा।
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