अमृतसर में फिर सड़कों पर बिखरा दूध ही दूध, किसानों ने 10 जून को लेकर दी सख्त चेतावनी

Edited By Kamini,Updated: 01 Jun, 2026 06:11 PM

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भारतीय किसान एकता सिद्धूपुर ने अमृतसर में नकली खोया, सिंथेटिक पनीर और मिलावटी डेयरी प्रोडक्ट्स के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया।

अमृतसर (रमन): भारतीय किसान एकता सिद्धूपुर ने अमृतसर में नकली खोया, सिंथेटिक पनीर और मिलावटी डेयरी प्रोडक्ट्स के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। किसानों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध जताने के लिए सड़कों पर दूध बहाया और मिलावटी खाने की चीजों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। इस बीच, किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर की जाने वाली छापेमारी सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है और शहर में खुलेआम नकली डेयरी प्रोडक्ट्स बेचे जा रहे हैं।

जिला अध्यक्ष करमजीत सिंह नंगली ने कहा कि उन्होंने कई बार सिविल सर्जन, पुलिस कमिश्नर और दूसरे सीनियर अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन कार्रवाई कुछ ही दिनों तक सीमित है। उनके मुताबिक, अमृतसर में बड़ी संख्या में दुकानें और फैक्ट्रियां घटिया क्वालिटी का खोया, पनीर और मिठाइयां बनाकर मार्केट में बेच रही हैं, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

किसान नेताओं ने कहा कि शहर के अलग-अलग इलाकों में चल रही फैक्ट्रियों में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक डेयरी प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। सस्ते दामों पर बेचे जा रहे इन प्रोडक्ट्स की वजह से एक तरफ लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ दूध उत्पादक और पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद संबंधित विभागों की तरफ से कोई असरदार कार्रवाई नहीं की जा रही है।

किसान नेताओं ने साफ किया कि उनका मकसद किसी भी खाने की चीज को बर्बाद करना नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि दूध उनके लिए अमृत जैसा है, लेकिन जब असली दूध उत्पादक परेशान हों और मार्केट में नकली प्रोडक्ट्स का धंधा फल-फूल रहा हो, तो विरोध दर्ज कराना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि 1 जून से 6 जून तक सिख समुदाय के लिए सेंसिटिव दिनों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना आंदोलन सीमित रखा है, लेकिन अगर प्रशासन ने जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं की तो 10 जून से बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि वे मिलावटी सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों के बाहर धरने और पक्का मोर्चा भी लगा सकते हैं।

इस मौके पर तहसीलदार हिरदे पाल सिंह ने किसानों से मांग पत्र लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन पहले भी फूड सेफ्टी टीमों के जरिए जांच करता रहा है और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के जरिए डिटेल में जांच करता रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की मांगों को जिला प्रशासन और डिप्टी कमिश्नर के ध्यान में लाया जाएगा और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

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