Punjab में उमस भरी गर्मी बच्चों के लिए बन सकती है खतरा, डॉक्टरों ने जारी की Advisory

Edited By Vatika,Updated: 04 Jul, 2026 11:28 AM

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गुरदासपुर सहित सीमावर्ती क्षेत्र में पिछले कई दिनों से तापमान लगभग 35 डिग्री सैल्सियस के आसपा

गुरदासपुर (हरमन): गुरदासपुर सहित सीमावर्ती क्षेत्र में पिछले कई दिनों से तापमान लगभग 35 डिग्री सैल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन हवा में अधिक नमी (उमस) होने के कारण लोगों को महसूस होने वाली गर्मी 45 डिग्री सैल्सियस से भी अधिक का एहसास करा रही है। भीषण गर्मी और उमस से जनजीवन, पशु-पक्षी और वनस्पति प्रभावित हो रहे हैं, जबकि छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह मौसम सबसे अधिक जोखिम भरा बन गया है। इसी को देखते हुए गुरदासपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डा. गुरखेल सिंह कलसी ने अभिभावकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए बच्चों को गर्मी से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा
डा. कलसी ने बताया कि बच्चों का शरीर अभी विकास की अवस्था में होता है और वे वयस्कों की तरह अपने शरीर के तापमान को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाते। बच्चों को पसीना भी अपेक्षाकृत कम आता है, जबकि उनका मेटाबॉलिज्म तेज होने के कारण शरीर में अधिक गर्मी उत्पन्न होती है। इसके अलावा बच्चे अधिक समय तक बाहर खेलते हैं और पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते, जिससे उनमें डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि गर्मी का प्रभाव केवल तत्काल बीमारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय तक अधिक तापमान में रहने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। शरीर में पानी की कमी और अधिक गर्मी के कारण बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और सीखने की क्षमता भी प्रभावित होती है। जिन विद्यालयों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होता, वहां बच्चों के लिए जोखिम और बढ़ जाता है। डा. कलसी के अनुसार लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी में रहने से शरीर में इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स बढ़ सकता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और भविष्य में संक्रमण तथा हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

बच्चों में गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों का खतरा
उन्होंने कहा कि एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं के लिए यह मौसम सबसे अधिक खतरनाक है। वे न तो स्वयं ठंडी जगह पर जा सकते हैं, न पानी मांग सकते हैं और न ही अपनी परेशानी बता सकते हैं। उनका शरीर अधिक गर्मी सोखता है तथा वातावरण के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता भी कम होती है। शोधों में भी इस आयु वर्ग के बच्चों में गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों और मृत्यु का खतरा अधिक पाया गया है। डा. कलसी ने बताया कि यदि बच्चा चिड़चिड़ा हो जाए, लगातार रोए, दूध या भोजन कम करे, उल्टियां आएं, पेशाब कम हो या बच्चा अत्यधिक सुस्त दिखाई दे, तो यह शरीर में पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि एक वर्ष से कम आयु के बच्चों को ठंडी, खुली और हवादार जगह पर रखा जाए।

उन्हें केवल हल्के सूती कपड़े पहनाए जाएं और अधिक कपड़ों में न लपेटा जाए। दिन में कम से कम एक बार सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से स्नान कराया जाए तथा लंबे समय तक गोद में रखने की बजाय हवादार स्थान पर लिटाया जाए। एक वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को दोपहर की तेज धूप में बाहर न जाने दिया जाए। उन्हें हवादार स्थान पर खेलने दिया जाए, दिन में कम से कम दो बार स्नान कराया जाए तथा हल्के सूती कपड़े पहनाए जाएं। शरीर में पानी की कमी से बचाने के लिए उन्हें नींबू पानी, लस्सी, सत्तू, ठंडा दूध, जलजीरा, आम पन्ना और अन्य घर में बने ठंडे पेय पदार्थ दिए जाएं। डा. कलसी ने कहा कि अभिभावकों को इस मौसम में बच्चों की सेहत के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय रहते सावधानी और उचित देखभाल से बच्चों को गर्मी से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।

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