बदलता मौसम बच्चों के लिए खतरा: डॉक्टरों की चेतावनी, हर बुखार को न समझें वायरल

Edited By Kalash,Updated: 24 Aug, 2026 12:32 PM

child health viral fever

अमृतसर में मौसम के बदलते मिजाज के बीच बच्चों पर वायरल संक्रमण का अटैक तेज होता दिखाई दे रहा है।

अमृतसर (दलजीत): अमृतसर में मौसम के बदलते मिजाज के बीच बच्चों पर वायरल संक्रमण का अटैक तेज होता दिखाई दे रहा है। उमस, बारिश और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच बड़ी संख्या में बच्चे तेज बुखार, सर्दी-जुकाम, गले में दर्द, लगातार खांसी, उल्टी-दस्त और सांस संबंधी तकलीफ लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।

शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल गुरु नानक देव अस्पताल के बच्चा विभाग में मरीजों का दबाव इस कदर बढ़ गया है कि चारों वार्डों के करीब 120 बैड लगभग भर चुके हैं। वहीं अमृतसर जिले के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी बाल रोग केंद्रों की ओ.पी.डी. में भी पिछले कुछ सप्ताह में 60 प्रतिशत से अधिक मरीज बढ़ने की बात सामने आ रही है। बच्चों में वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार गुरु नानक देव अस्पताल के बच्चा विभाग में चार वार्ड हैं। प्रत्येक वार्ड में करीब 30 बैड की क्षमता है। यानी कुल मिलाकर लगभग 120 बैड उपलब्ध हैं। मौजूदा समय में इन वार्डों में वायरल बुखार, सांस संबंधी संक्रमण, गैस्ट्रो और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में भर्ती हैं। अस्पताल में लगातार नए मरीज पहुंचने के कारण स्वास्थ्य कर्मियों पर भी दबाव बढ़ गया है। ओ.पी.डी. में भी बच्चों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई अभिभावक बच्चों को लेकर अस्पतालों और निजी क्लीनिकों का रुख कर रहे हैं।

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर ज्यादा खतरा 

सरकारी मैडीकल कॉलेज के बच्चा विभाग के सीनियर डाक्टर संदीप अग्रवाल के अनुसार 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में वायरल संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। कई बच्चों में तेज बुखार के साथ खांसी, जुकाम, गले में दर्द और कमजोरी के लक्षण हैं। कुछ बच्चों में उल्टी-दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी का खतरा भी रहता है। छोटे बच्चों में सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या दूध-पानी पीने से इंकार जैसे लक्षण सामने आने पर अभिभावकों को तुरंत मैडीकल सहायता लेनी चाहिए। मौजूदा मौसम में बच्चों में अलग-अलग वायरल संक्रमण देखने को मिल सकते हैं। इनमें आर.एस.वी., इन्फ्लूएंजा, एडीनोवायरस और एंटरोवायरस जैसे संक्रमण शामिल हैं। हालांकि हर बच्चे में कौन-सा वायरस संक्रमण का कारण है, यह केवल लक्षणों के आधार पर तय नहीं किया जा सकता और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं। डा. अग्रवाल के अनुसार आर.एस.वी. छोटे बच्चों में सांस संबंधी संक्रमण का कारण बन सकता है वहीं इन्फ्लूएंजा में तेज बुखार, शरीर में दर्द और लंबे समय तक खांसी की शिकायत हो सकती है। कुछ वायरल संक्रमणों में बुखार के साथ आंखों में लालपन, पेट दर्द और दस्त भी हो सकते हैं।

वायरल के बीच डेंगू का भी खतरा 

अमृतसर में मानसून के दौरान वायरल संक्रमण के साथ डेंगू का खतरा भी बना हुआ है। बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में लगातार तेज बुखार आने पर अभिभावकों को बच्चे को केवल वायरल मानकर घर पर दवा देने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बुखार का कारण जानने के लिए बच्चे की जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।

चेतावनी: खुद से एंटीबायोटिक देना पड़ सकता है भारी 

डा. नरेश चावला के अनुसार अधिकांश वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक दवाएं सीधे तौर पर काम नहीं करतीं। इसलिए अभिभावकों को बिना डाक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिएं। बच्चे को पर्याप्त तरल पदार्थ देना, आराम करवाना, हाथों की सफाई रखना और बीमार बच्चे को दूसरे बच्चों के संपर्क में आने से बचाना जरूरी है। बारिश के मौसम में साफ पानी और ताजा भोजन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।

हर बुखार वायरल नहीं होता

डा. रजनीश शर्मा के अनुसार इस समय बच्चों में वायरल संक्रमण के मरीज बढ़ रहे हैं। छोटे बच्चों में संक्रमण तेजी से गंभीर हो सकता है। अभिभावक तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी और बच्चे की असामान्य सुस्ती को नजर-अंदाज न करें। हर बुखार वायरल नहीं होता और हर वायरल संक्रमण में एक जैसी दवा नहीं दी जाती। बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक देना उचित नहीं है। लक्षण ज्यादा होने पर बच्चे को डॉक्टर को दिखाना चाहिए। 

बच्चों को हो समस्या तो तुरंत डाक्टर से करें सम्पर्क 

सेवा मुक्त सिविल सर्जन डा. स्वर्णजीत धवन के अनुसार मानसून में वायरल संक्रमण के साथ उल्टी-दस्त के मरीज भी बढ़ते हैं। छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन तेजी से हो सकता है। अगर बच्चा पानी या दूध नहीं ले रहा अथवा पेशाब कम हो गया है तो तुरंत मैडीकल सहायता लें। मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए हाथों की स्वच्छता, साफ पानी और ताजा भोजन पर ध्यान देना जरूरी है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर छोटे बच्चों को ले जाने से बचें और आसपास पानी जमा न होने दें।

बच्चों में ये लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें 

अगर बच्चों में दो दिन से ज्यादा लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या बहुत तेज सांस चलना, लगातार उल्टी या दस्त, पानी, दूध या खाना लेने से इनकार, अत्यधिक सुस्ती या बच्चा सामान्य प्रतिक्रिया न दे, पेशाब कम होना, लगातार बढ़ती खांसी या सांस में सीटी जैसी आवाज के लक्ष्ण सामने आए तो तुरंत डाक्टरों से परामर्श करना चाहिए।

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