चंद्रशेखर आजाद के पोते ने कहा-कांग्रेस सी.ए.ए. के बारे में लोगों को कर रहे भ्रमित

Edited By Sunita sarangal,Updated: 29 Jan, 2020 11:43 AM

chandrashekhar azad s grandson is with caa

केंद्र सरकार का फैसला जनहित में, विरोध करने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई

जालंधर(कमलेश): नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) केन्द्र सरकार द्वारा देश हित में लिया गया एक बड़ा फैसला है और सबको इस फैसले का समर्थन करना चाहिए। यह बात पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष किशन लाल शर्मा और स्वतंत्रता सेनानी चन्द्रशेखर आजाद के पोते अमित आजाद ने जालंधर में हुई प्रैस वार्ता के दौरान कही। 

आजाद ने हुंकार भरते हुए कहा कि आजाद परिवार पूरी तरह से केन्द्र सरकार के इस फैसले के साथ खड़ा है। यह फैसला वर्तमान समय को देखते हुए नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य को देखते हुए लिया गया है। जो लोग इस फैसले के खिलाफ हैं, वे सी.ए.ए. के बारे में बिल्कुल ज्ञान नहीं रखते या विरोध करना ही उनकी नीति है। 

आजाद ने कहा कि आज जो सांसद सी.ए.ए. का विरोध कर रहे हैं वे भूल गए हैं कि उनकी सरकार के समय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 18 दिसम्बर, 2013 को संसद में कहा था कि बंगलादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से आए हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन व पारसियों को उनका हक मिलना चाहिए। मनमोहन सिंह ने संसद से नागरिकता बिल लाने की मांग भी की थी। ऐसे में कांग्रेस सहित कई दल लोगों को भ्रमित कर दोगली राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश को तोड़ने वाले लोगों पर जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। 

इस मौके पर किशन लाल शर्मा ने कहा कि शाहीन बाग दिल्ली में हो रहे विरोध में आम आदमी पार्टी का हाथ है, क्योंकि जालंधर में गत दिवस हुए प्रदर्शन में ‘आप’ के पूर्व विधायक ने भी हिस्सा लिया था। उन्होंने केंद्र सरकार से जल्द इस मामले में अराजकता फैलाने वाले लोगों पर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान अशोक गांधी, संजय पराशर भी मौजूद थे।

25 नवम्बर, 1947 को कांग्रेस के संकल्प पत्र में था नागरिकता देने का उल्लेख
आजाद ने कहा कि 25 नवम्बर, 1947 को कांग्रेस के संकल्प पत्र में भी लिखा गया था कि पाकिस्तान और भारत से अलग हुए अन्य देशों में बसे हिन्दुओं व सिखों को सुरक्षा देने के लिए हम बाध्य हैं। विरोध कर रहे लोग सी.ए.ए. को एन.सी.आर. बताकर लोगों को भ्रमित कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। सी.ए.ए. ऐसे लोगों के लिए है, जो गैर-मुस्लिम हैं और अन्य देशों में परेशानी के चलते भारत आए हैं। वहीं एन.सी.आर. भारत के नागरिकों को रिकार्ड है। 

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