Edited By Subhash Kapoor,Updated: 22 Jan, 2026 10:52 PM

25 दिसंबर को जोशी नगर निवासी अमर जोशी जो लिवर ट्रांसप्लांट करने के लिए अस्पताल आया था, लेकिन उपचार दौरान उसकी मौत हो गई। इसी बीच बकाया बिल के चलते अस्पताल द्वारा मरीज का शव 15 घंटे रोके रखा गया।
लुधियाना (सहगल) : 25 दिसंबर को जोशी नगर निवासी अमर जोशी जो लिवर ट्रांसप्लांट करने के लिए अस्पताल आया था, लेकिन उपचार दौरान उसकी मौत हो गई। इसी बीच बकाया बिल के चलते अस्पताल द्वारा मरीज का शव 15 घंटे रोके रखा गया। बाद में मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से अस्पताल को डेड बॉडी रिलीज करनी पड़ी और साथ ही साथ बिल भी कथित तौर पर माफ कर दिया गया परंतु कुछ दिनों बाद अस्पताल द्वारा मृतक मरीज के पुत्र को 5,47,950 का नोटिस भेज दिया गया और इसकी वसूली 18% जीएसटी के साथ करने को कहा गया। एक बार फिर मृतक मरीज के परिजन मानवाधिकार आयोग की शरण में पहुंच गए हैं। आयोग के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह शंटी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अस्पताल प्रबंधन को जवाब तलबी के लिए आयोग में तलब कर लिया है।
प्लॉट बेचकर जमा कर आए थे पैसे, अस्पताल से थी बहुत उम्मीद
मृतक मरीज के परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपना एक प्लॉट बेचकर अस्पताल में पैसे जमा कराए थे और उन्हें अस्पताल से काफी उम्मीद थी। उनके साथ 17 लाख का पैकेज तय हुआ था परंतु उपचार के तीसरे दिन ही मरीज की मौत हो गई। अस्पताल द्वारा न सिर्फ मेरे मरीज की डेड बॉडी को रोका गया बल्कि लिवर ट्रांसप्लांट के लिए लिवर डोनेट करने वाली मरीज की पत्नी को भी बिना पैसे लिए डिस्चार्ज नहीं किया गया और उन्हें डिस्चार्ज करने के लिए अस्पताल में एक लाख रुपया उधार पकड़कर जमा करना पड़ा।
परिवार द्वारा पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग में लगाए गए आरोपों के अनुसार डीएमसी ने पहले शव रोका, जिसे मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से रिलीज किया गया और साथ ही साथ बिल माफ करने की घोषणा कर दी गई। अब वसूली का नोटिस थमा दिया है। उन्होंने कहा कि मृतक मरीज के उपचार के लिए घर-परिवार की जमा पूंजी और कर्ज सब कुछ दांव पर लगाने के बाद भी परिवार को मृतक मरीज का शव भी समय पर नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि इलाज से पहले डीएमसी प्रबंधन की ओर से यह भरोसा दिया गया था कि लिवर ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन सफल रहेगा, लेकिन ऑपरेशन के बाद मरीज की तबीयत खराब होनी शुरू हो गई। आपरेशन के तीन दिन बाद अमर की मौत हो गई। उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान हुआ है।
आयोग की डेड बॉडी ना रोकने की एडवाइजरी को किया अनदेखा
उल्लेखनीय है कि पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने 6 दिसंबर को किसी भी अस्पताल में मरीज की मृत्यु होने पर बकाया बिल के एवज में मृतक मरीज की डेड बॉडी ना रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की थी परंतु अस्पताल द्वारा इसे भी अनदेखा कर दिया गया इस मामले में अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोई टिप्पणी नहीं की जा रही। अब देखना है यह है कि इस मामले में पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग का क्या रवैया रहता है।