Edited By Urmila,Updated: 03 Apr, 2026 03:06 PM

सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) और शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का नया पाठ्यक्रम शुरू किया है।
लुधियाना (विक्की): सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) और शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का नया पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को शुरूआती स्तर से ही डिजिटल और तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करना है।
सी.बी.एस.ई. द्वारा जारी इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को सरल और गतिविधि-आधारित तरीके से ए.आई. की बुनियादी समझ दी जाएगी। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए हैंडबुमी और छात्रों के लिए अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाएगी जिससे पढ़ाई को आसान और रोचक बनाया जा सके।
बच्चों को यह होगा फायदा?
इस नए पाठ्यक्रम से बच्चों में लॉजिकल थिंकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग और क्रिएटिविटी विकसित होगी। ए.आई. की शुरूआती समझ मिलने से वे भविष्य में तकनीक से जुड़े करियर विकल्पों के लिए तैयार हो सकेंगे। साथ ही डिजिटल साक्षरता बढ़ेगी और बच्चे समझदारी से तकनीक का उपयोग करना सीखेंगे।
स्कूलों को क्या करना होगा?
- शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी।
- कक्षा के अनुसार गतिविधि-आधारित पढ़ाई को अपनाना होगा।
- स्कूलों को डिजिटल संसाधन और जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करना होगा।
- छात्रों का मूल्यांकन पारंपरिक परीक्षा की बजाय प्रोजैक्ट और प्रैक्टिकल आधार पर किया जाएगा।
आगे की यह है योजना
जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए भी यह पाठ्यक्रम लाया जाएगा, जबकि 11वीं और 12वीं में इसे वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है जिसका मकसद शिक्षा को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाना है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
नए सिलेबस में क्या है खासियत
-पढ़ाई का तरीका होगा अलग और अधिक रोचक।
-खेल, पहेली और गतिविधियों के माध्यम से सीखने पर जोर।
-बड़े सवालों को छोटे-छोटे हिस्सों में हल करने की समझ विकसित करना।
-समूह चर्चा और टीमवर्क को बढ़ावा देना।
-रटने की बजाय समझ और कौशल आधारित पढ़ाई पर फोकस।
-परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव, प्रायोगिक और परियोजना आधारित मूल्यांकन।
-विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और समझ को प्राथमिकता।
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