Edited By Kalash,Updated: 28 Mar, 2026 11:24 AM

स्कूलों में 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षिक सैशन को लेकर जहां एक ओर तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और अध्यापकों के लिए यह नया सेशन भारी टैंशन लेकर आने वाला है।
लुधियाना (विक्की): स्कूलों में 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षिक सैशन को लेकर जहां एक ओर तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और अध्यापकों के लिए यह नया सेशन भारी टैंशन लेकर आने वाला है। एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा 9वीं कक्षा के सिलेबस में किए गए बड़े बदलावों के बाद आलम यह है कि नया सैशन सिर पर होने के बावजूद बाजार से किताबें पूरी तरह गायब हैं।
हैरानी की बात यह है कि किताबों के बदलने का नोटिफिकेशन फरवरी के अंत में ही आ गया था लेकिन इसके बावजूद समय पर किताबों की छपाई और दुकानों पर इनकी उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो सकी है। अब हालात यह हैं कि विद्यार्थियों को खाली हाथ बुक-शॉप्स से लौटना पड़ रहा है, जिससे न केवल उनकी पढ़ाई अधर में लटक गई है, बल्कि उन पर मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है।
मई के अंत तक किताबें आने की उम्मीद नहीं, फिर छुट्टियां शुरू
8वीं पास कर 9वीं कक्षा में पहुंचे विद्यार्थी जब अपने अभिभावकों के साथ नई किताबें खरीदने मार्कीट जा रहे हैं तो उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, इंगलिश, मैथ्स, साइंस, एस.एस.टी., हिंदी, हिस्ट्री, जियोग्राफी और सिविक्स जैसे मुख्य विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं हैं । बताया जा रहा है कि फरवरी के अंत में इन किताबों के बदलने का नोटिफिकेशन आया था लेकिन अभी तक मई महीने तक भी इन किताबों के आने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ऐसे में मई और जून की छुट्टियों से पहले सिलेबस कैसे पूरा होगा, इसे लेकर अध्यापक और अभिभावक दोनों ही गहरी चिंता में हैं।
पुरानी किताबें बेचकर पेरैंट्स से ठगी कर रहे कई बुक सैलर
हालात तो यह हैं बाजार में किताबों की इस कमी का फायदा कुछ मुनाफाखोर बुक-विक्रेता उठा रहे हैं। वे मोटे मुनाफे के लालच में अभिभावकों और बच्चों को गुमराह कर पुरानी क्लास वाली किताबें ही थमा रहे हैं जबकि एन.सी.ई.आर.टी. और सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) पहले ही साफ कर चुके हैं कि 9वीं का सिलेबस पूरी तरह बदल चुका है। इतना ही नहीं, 9वीं कक्षा के बदले हुए सिलेबस के नामों तक को अभी फाइनल नहीं किया गया है।
अध्यापकों के सामने प्रोजैक्ट और सिलेबस की चुनौती
अध्यापकों का कहना है कि अगर किताबें ही नहीं होंगी तो वे सिलेबस कैसे तैयार करेंगे और बच्चों को क्या पढ़ाएंगे। मई के तीसरे हफ्ते में छुट्टियां शुरू हो जाएंगी और स्कूल जुलाई में खुलेंगे जिससे बच्चों की पढ़ाई काफी लेट हो जाएगी। बिना किताबों के बच्चे प्रोजैक्ट कैसे बनाएंगे, यह भी एक बड़ी मुसीबत बनी हुई है। हालांकि, छठी और 7वीं कक्षा की बदली हुई किताबें बाजार में आ चुकी हैं लेकिन 8वीं कक्षा की समाजिक शिक्षा पार्ट-2 की किताब भी अभी तक उपलब्ध नहीं है।
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