Edited By Subhash Kapoor,Updated: 14 Jul, 2026 05:44 PM

लुधियाना नगर निगम के जोन-बी में भ्रष्टाचार और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के गंभीर आरोपों में घिरे बिल्डिंग इंस्पेक्टर दिलीप सोनी पर आखिरकार लोकल गवर्नमेंट की गाज गिर गई है। सुंदर नगर इलाके में नियमों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई एक बहु-मंजिला अवैध...
लुधियाना (राज): लुधियाना नगर निगम के जोन-बी में भ्रष्टाचार और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के गंभीर आरोपों में घिरे बिल्डिंग इंस्पेक्टर दिलीप सोनी पर आखिरकार लोकल गवर्नमेंट की गाज गिर गई है। सुंदर नगर इलाके में नियमों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई एक बहु-मंजिला अवैध इमारत के मामले में सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए दिलीप सोनी को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंशन पीरियड के दौरान उनका हेडक्वार्टर लुधियाना से हटाकर मोगा फिक्स किया गया है। यह कार्रवाई लुधियाना नगर निगम की पूर्व कमिश्नर नीरू कत्याल गुप्ता की ओर से भेजी गई सिफारिश रिपोर्ट पर लोकल बॉडी सेक्रेटरी द्वारा अमल में लाई गई है। इस सस्पेंशन के बाद निगम के भ्रष्ट अधिकारियों और अवैध बिल्डिंग माफिया में हड़कंप मच गया है।
कमीशन के शिकंजे से बचने को बदला था जोन; मानवाधिकार आयोग के हंटर से फंसा मामला
विभागीय सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिल्डिंग इंस्पेक्टर दिलीप सोनी लंबे समय तक नगर निगम के बी-जोन (Zone B) में मलाईदार सीट पर तैनात रहे। इसी दौरान सुंदर नगर में एक विशाल बहु-मंजिला अवैध बिल्डिंग का निर्माण धड़ल्ले से करवाया गया। जब इस अवैध निर्माण को लेकर शिकायतें बढ़ीं और मामला तूल पकड़ने लगा, तो शातिर इंस्पेक्टर ने खुद को बचाने के लिए बड़ी चालाकी से अपना तबादला नगर निगम के सी-जोन (Zone C) में करवा लिया। इस पूरे घोटाले की गूंज पंजाब ह्यूमन राइट्स कमिशन (मानवाधिकार आयोग) तक जा पहुँची। आयोग ने मामले की संजीदगी को देखते हुए पूर्व कमिश्नर नीरू कत्याल गुप्ता को कड़ा नोटिस जारी कर जवाब तलब किया, जिसके बाद बैकफुट पर आए निगम प्रशासन ने सुंदर नगर की अवैध बिल्डिंग पर डिमोलिशन की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था।
सी-जोन जाते ही फिर लगे दाग: विश्वकर्मा चौक से जनकपुरी तक 'सोनी के आशीर्वाद' से बनी कई अवैध बिल्डिंग
बी-जोन से सी-जोन में ट्रांसफर होने के बाद भी दिलीप सोनी की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया और शिकायतों का दौर लगातार जारी रहा। सी-जोन का चार्ज लेते ही उन पर विश्वकर्मा चौक से ढोलेवाल चौक को जाने वाली मुख्य सर्विस लेन पर एक विशाल कमर्शियल बिल्डिंग के अवैध निर्माण को हरी झंडी देने के बदले लाखों रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेने के संगीन आरोप लगे। इतना ही नहीं, इलाके के जनकपुरी में भी नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई 5 अवैध दुकानों के पीछे भी 'सोनी का आशीर्वाद' सरेआम चर्चा में रहा। इन दुकानों को कागजी खानापूर्ति के लिए नोटिस तो जारी किए गए, लेकिन दिलीप सोनी की कथित मिलीभगत के कारण धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कांग्रेसी पार्षद ने 'लाइव' होकर 5 लाख में बिल्डिंग का ठेका लेने के लगाए आरोप
इस पूरे मामले में उस समय सबसे बड़ा नाटकीय मोड़ आया था, जब सुंदर नगर में निर्माणाधीन अवैध बिल्डिंग पर कार्रवाई करने पहुँची निगम की तहबाजारी और बिल्डिंग ब्रांच की टीम का कांग्रेसी पार्षद अरुण शर्मा ने मौके पर पहुँच कर कड़ा विरोध किया। पार्षद अरुण शर्मा ने सोशल मीडिया पर बाकायदा 'लाइव' होकर सरेआम आरोप लगाया था कि जोन-ए में तैनात एक अन्य रसूखदार बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने इस पूरी अवैध बिल्डिंग का निर्माण बिना किसी रोक-टोक के करवाने के लिए 5 लाख रुपये का फिक्स ठेका लिया हुआ था। यह रसूखदार इंस्पेक्टर पहले बी-जोन में तैनात था और बाद में जोन-ए में एटीपी (ATP) का एडिशनल चार्ज भी देख चुका है। बताया जा रहा है कि जब सुंदर नगर का विवाद बढ़ा, तो इसी बड़े अधिकारी ने दिलीप सोनी के बी-जोन से चार्ज कटवाने और सेफ एग्जिट दिलाने में पर्दे के पीछे से मुख्य भूमिका निभाई थी।
विभागीय जांच रहेगी जारी, कसेगा शिकंजा: लोकल बॉडी ऑफिस पंजाब
लोकल बॉडी विभाग, पंजाब सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेशों में साफ कहा गया है कि दिलीप सोनी को ड्यूटी के दौरान बरती गई घोर अनियमितताओं, भ्रष्टाचार के आरोपों और अवैध निर्माणों को बढ़ावा देने के मद्दनेज़र तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सस्पेंशन महज एक शुरुआत है; दिलीप सोनी के कार्यकाल के दौरान जोन-बी और जोन-सी में बने अन्य अवैध निर्माणों की फाइलों को भी री-ओपन किया जा रहा है। मामले की विभागीय चार्जशीट और उच्च स्तरीय जांच लगातार जारी रहेगी,