Edited By Urmila,Updated: 19 Apr, 2026 02:27 PM

गुरदासपुर के कमालपुर जट्टा गांव के लोगों ने, जो भारत-पाकिस्तान बॉर्डर (ज़ीरो लाइन) के बहुत पास है, सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध जताया है और गांव में मौजूद भयानक दिक्कतों का पर्दाफाश किया है।
दीनानगर (हरजिंदर सिंह गोराया) : गुरदासपुर के कमालपुर जट्टा गांव के लोगों ने, जो भारत-पाकिस्तान बॉर्डर (ज़ीरो लाइन) के बहुत पास है, सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध जताया है और गांव में मौजूद भयानक दिक्कतों का पर्दाफाश किया है। गांव के लोगों ने अपनी दर्द भरी कहानी सुनाई और कहा कि वे आज के ज़माने में भी नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। बातचीत के दौरान परमजीत सिंह और अमर सिंह ने कहा कि गांव में कोई सरकारी स्कूल नहीं है। छोटे बच्चों को पढ़ने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। रास्ते में हमेशा आवारा कुत्तों और कई दूसरे खतरों का डर बना रहता है।
गांव में कोई डिस्पेंसरी या हॉस्पिटल नहीं है। किसी भी इमरजेंसी में लोगों को शहरों की तरफ भागना पड़ता है। जिससे कभी-कभी जान जाने का खतरा भी रहता है। बॉर्डर एरिया और दरियाई वाला इलाका होने की वजह से गांव का पानी पीने लायक नहीं है। गांव में पानी की टंकी नहीं है और कुछ नलों का पानी भी बहुत खराब है। गांव को जाने वाली सड़कों की हालत बहुत खराब है। इसके साथ ही, बिजली सप्लाई भी खराब हालत में है। तेज हवा चलने पर भी बिजली काट दी जाती है। पहले बॉर्डर एरिया के युवाओं को नौकरियों में खास छूट (बॉर्डर एरिया सर्टिफिकेट) मिलती थी, जो अब बंद कर दी गई है।
इस वजह से पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। गांववालों ने कहा कि चुनाव के समय हर पार्टी के नेता वोट लेने के लिए यहां आते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई भी इन बॉर्डर गांवों की सुध नहीं लेता। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसे हालात में भी वह अपनी जमीन और गांव नहीं छोड़ते, लेकिन सरकार ने उन्हें नजरअंदाज किया है। गांववालों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बुनियादी मांगें (स्कूल, अस्पताल, पानी की टंकियां और सड़कें) जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे आने वाले चुनाव में कड़ा फैसला लेने पर मजबूर होंगे।
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