Edited By Kamini,Updated: 16 Aug, 2026 05:02 PM

आम तौर पर इंसान अपने बच्चों के लिए घर बनाता है, लेकिन एक महिला ने अपने घर को बेजुबान पक्षियों के घोंसलों की दुनिया बना दिया।
मोगा (कशिश, विपन): आम तौर पर इंसान अपने बच्चों के लिए घर बनाता है, लेकिन मोगा जिले के निधावाला गांव की एक महिला ने अपने घर को बेजुबान पक्षियों के घोंसलों की दुनिया बना दिया। अपनी बेटी के प्यार को महसूस करते हुए हरप्रीत कौर ने गौरैया को अपनी बेटियां और प्रिंसेस मान लिया। आज उनके घर में 300 से ज़्यादा घोंसले हैं और हज़ारों पक्षी यहां दाना लेने और घोंसले बनाने आते हैं। सुबह की शुरुआत गौरैया की चहचहाहट से होती है और इन बेजुबान पक्षियों से बातें करते हुए हरप्रीत कौर अपने दुख भूल जाती हैं।
एक छोटे से डिब्बे से शुरू हुआ सफर
मोगा जिले के निधावाला गांव की रहने वाली हरप्रीत कौर का पक्षियों से यह प्यार आज नहीं, बल्कि करीब डेढ़ दशक पहले शुरू हुआ था। हरप्रीत कौर बताती हैं कि 2010 में जब उनका पुराना घर तोड़ा जा रहा था, तो एक गौरैया अपने 2 बच्चों के साथ घोंसले में बैठी थी। घर गिरने से उसका घोंसला भी गिर गया। उस समय हरप्रीत ने जूतों से एक कार्डबोर्ड बॉक्स बनाकर गौरैया के लिए घर में टांग दिया। गौरैया ने उसमें फिर से घोंसला बनाया, अंडे दिए और बच्चों को जन्म दिया। यहां से एक ऐसा सफर शुरू हुआ जिसने आज पूरे घर को गौरैया का अड्डा बना दिया है। हरप्रीत कौर ने कहा कि मेरी ख्वाहिश थी कि भगवान मेरे घर में बेटे के साथ एक बेटी भी दे, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया। अब मेरी ये राजकुमारियां मेरी बेटियां हैं। जब मैं उनके बीच बैठती हूं, तो अपने सारे दुख-दर्द भूल जाती हूं। घर का शायद ही कोई कोना हो जहां गौरैया के लिए ठिकाना न हो।

गौरतलब है कि हरप्रीत कौर ने 300 से ज़्यादा ठिकाने लगाकर अपने घर को चिड़ियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना दिया है। सुबह होते ही पूरे गांव की गौरैया दाना चुगने उनके घर आ जाती हैं। पूरा आंगन गौरैया की चहचहाट से गूंज उठता है। हरप्रीत कहती हैं कि जब मैं अपनी आवाज में सीटी बजाती हूं या पुकारती हूं "मेरी राजकुमारियों, मेरे बेटे, आओ", तो ये पक्षी उनके पास आते हैं। जब वह सुबह चाय का कप उठाती हैं, तो उनकी राजकुमारियां सबसे पहले आती हैं। उन्होंने कहा कि पूरा आंगन उनसे भर जाता है। जब मैं सीटी बजाती हूं और पुकारती हूं, तो वे मेरे पास आती हैं। मुझे लगता है कि वे मेरी बेटियां हैं।

पक्षियों के लिए सिर्फ आश्रय नहीं, पूरा परिवार
हरप्रीत कौर कहती हैं कि इन पक्षियों से उनका रिश्ता सिर्फ़ उन्हें दाना-पानी देने तक सीमित नहीं है। जब भी घर में कोई खुशी का मौका होता है, चाहे बच्चे का जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह हो या कोई और कार्यक्रम, वह अपनी राजकुमारियों के लिए एक नया घर लाती हैं। इस सेवा में उनके ससुराल वाले, पति और देवर भी पूरा साथ देते हैं। हरप्रीत कहती हैं कि कई लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया है लेकिन उन्होंने यह सेवा कभी बंद नहीं की। उनका एकमात्र लक्ष्य बेज़ुबान पक्षियों की सेवा करना और उनकी संख्या बढ़ाना है। हरप्रीत कौर ने कहा कि वह प्रकृति में हो रहे बदलावों को लेकर भी चिंतित हैं। वह कहती हैं कि पिछले कुछ सालों में गौरैया, चिड़िया, तोते, गुट्टारा, मोर, कबूतर और कौवे जैसे कई पुराने पक्षियों की संख्या में कमी आई है। प्रदूषित पानी, प्रदूषित पर्यावरण, फसलों पर कीटनाशकों का ज़्यादा इस्तेमाल और फसल के बचे हुए हिस्से को जलाना पक्षियों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं। हरप्रीत का मानना है कि अगर आज हमने पक्षियों और प्रकृति के लिए कुछ नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए ये सिर्फ़ किताबों में पढ़ने वाली विरासत बनकर रह जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मेरा दावा है कि जो इंसान इन बेजुबान पक्षियों की सेवा करता है, भगवान उस पर कृपा करते हैं। आज मेरी राजकुमारियों की वजह से बड़े-बड़े टीवी चैनल मेरे घर आए और मेरा नाम दुनिया भर में पहुंचा। हरप्रीत कौर ने कहा कि “गौरैया हमारे आंगन की शान हैं… इन्हें बचाना हमारा फर्ज़ है। एक छोटे से जूते के डिब्बे से शुरू हुई हरप्रीत कौर की यह मुहिम आज सैकड़ों शेल्टर तक पहुंच चुकी है। हरप्रीत कौर की यह कहानी सिर्फ़ एक महिला की सेवा नहीं है, बल्कि हमें यह संदेश भी देती है कि प्रकृति की रक्षा के लिए हमें बड़े काम करने की ज़रूरत नहीं है, बस एक छोटी सी शुरुआत करनी है।

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