Edited By Vatika,Updated: 27 Oct, 2026 11:27 AM

जिले में धान की थ्रेशिंग का काम रफ्तार पकड़ने के साथ ही शहर की फिजाओं में धुआं और प्रदूषण घुलने लगा है।
लुधियाना (राज): जिले में धान की थ्रेशिंग का काम रफ्तार पकड़ने के साथ ही शहर की फिजाओं में धुआं और प्रदूषण घुलने लगा है। आसपास के जिलों में पराली जलाने की घटनाओं के चलते औद्योगिक नगरी लुधियाना की हवा लगातार खराब होकर 'येलो जोन' (मध्यम श्रेणी) में बनी हुई है। 26 अक्तूबर को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 126 दर्ज किया गया। हवा में घुले इस जहर का सीधा असर आम जनता, खासकर बुजुर्गों, दिल के मरीजों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है।
एक हफ्ते से येलो जोन में शहर, AQI 169 तक पहुंचा
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक सप्ताह के दौरान शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार चिंताजनक बना हुआ है:
20 अक्तूबर: 101
21 अक्तूबर: 155
22 अक्तूबर: 113
23 अक्तूबर: 147
24 अक्तूबर: 169
25 अक्तूबर: 92
26 अक्तूबर: 126
विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से फेफड़ों के संक्रमण, सांस फूलने और छाती में जकड़न की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
35% कटाई पूरी, सैटेलाइट से जगराओं में डिटेक्ट हुई पराली जलाने की घटना
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 2.83 लाख हेक्टेयर रकबे में से अब तक करीब 35 प्रतिशत हिस्से में धान की कटाई पूरी हो चुकी है। प्रशासन सेटेलाइट मॉनिटरिंग के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहा है। जगराओं इलाके में सैटेलाइट के जरिए पराली जलाने की लोकेशन ट्रेस हुई, जिसके बाद प्रशासनिक टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मुआयना किया, जहां खेत के आसपास घास-फूस जली पाई गई। गौरतलब है कि पिछले साल जिले में पराली जलाने के कुल 219 मामले सामने आए थे। प्रशासन का दावा है कि किसानों को जागरूक करने के लिए लगातार कैंप लगाए जा रहे हैं और सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की कतार, 8 महीने में 941 नए केस
प्रदूषण का सीधा प्रभाव सिविल अस्पताल की ओपीडी में देखने को मिल रहा है। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 8 महीनों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और अस्थमा के संदिग्ध 1355 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें से 941 नए मरीज सामने आए। इनमें से 788 मरीजों का उपचार चल रहा है, जबकि 153 मरीज इलाज बीच में ही छोड़ चुके हैं। बीते दो महीनों की बात करें तो 235 संदिग्ध मरीजों की जांच में से 192 लोग सीओपीडी से पीड़ित पाए गए। डॉक्टरों ने अस्थमा और सांस के पुराने मरीजों को सुबह-शाम सैर से बचने और घर से बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।