Edited By Kalash,Updated: 20 May, 2026 06:12 PM

पंजाब के मालवा क्षेत्र सहित बठिंडा में इस समय गर्मी ने अपना सबसे भयावह रूप धारण कर लिया है।
बठिंडा (विजय वर्मा): पंजाब के मालवा क्षेत्र सहित बठिंडा में इस समय गर्मी ने अपना सबसे भयावह रूप धारण कर लिया है। तपती धूप, आग जैसी गर्म हवाएं और लगातार बढ़ता तापमान आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रहा है। पिछले एक सप्ताह से शहर का पारा 46 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिसके चलते बठिंडा पंजाब के सबसे गर्म शहरों में शामिल हो गया है। हीट वेव और लू के डबल अटैक ने लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल कर दिया है।
दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सड़कें सुनसान दिखाई दे रही हैं। शहर के बाजारों की रौनक गायब हो चुकी है और लोग बिना जरूरी काम के घरों से बाहर नहीं निकल रहे। हालात इतने गंभीर हैं कि तपती धूप के कारण सड़कों की तारकोल तक पिघलने लगी है। सूरज की सीधी पड़ती किरणें और गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों की त्वचा और शरीर पर साफ असर डाल रहे हैं।
गर्मी से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। कोई ठंडे पानी, जूस और लस्सी का सहारा ले रहा है तो कोई सिर और शरीर को ढककर घर से बाहर निकल रहा है। शहर की कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा ठंडे पानी की छबीलें लगाकर राहगीरों को राहत पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद प्रकृति की मार के आगे लोग खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं।
इस भीषण गर्मी का असर नगर निगम चुनावों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बठिंडा सहित पंजाब के विभिन्न वार्डों में 1000 से अधिक उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन तपती गर्मी ने चुनाव प्रचार की रफ्तार धीमी कर दी है। उम्मीदवार अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और समर्थकों को घर-घर प्रचार के लिए मनाते नजर आ रहे हैं, लेकिन लोग भीषण गर्मी में बाहर निकलने से बच रहे हैं। पंजाब सरकार द्वारा गर्मी को देखते हुए चुनाव प्रचार के लिए केवल 15 दिनों का समय दिया गया था, लेकिन अब वही समय उम्मीदवारों के लिए भारी साबित हो रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 72 घंटों तक भी किसी बड़ी राहत की संभावना नहीं है। न बारिश के आसार हैं और न ही बादलों की गर्जना सुनाई देने की उम्मीद। सूरज की तपिश और लू की तेज हवाएं जानलेवा साबित हो रही हैं। गर्मी के कारण अब तक आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी भी सामने आई है, जिनमें कई बेसहारा और दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से लोगों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने की अपील की गई है। खुले में काम करने वाले मजदूरों को बार-बार पानी पीने, छांव में आराम करने और शरीर को ढककर रखने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने भी चेतावनी दी है कि गर्मी और लू के कारण डिहाइड्रेशन, त्वचा रोग, आंखों में जलन, दिल और पेट की बीमारियां, खांसी-जुकाम और हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
हालांकि गर्मी अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंच चुकी है, लेकिन स्कूली बच्चों को अभी तक कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। अभिभावकों द्वारा लगातार मांग की जा रही है कि स्कूलों का समय घटाया जाए या छुट्टियों का ऐलान किया जाए, ताकि बच्चों को इस भीषण गर्मी से बचाया जा सके। बठिंडा की सूखी धरती पर गर्मी का यह कहर लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हर कोई अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है कि शायद बारिश की कुछ बूंदें ही इस तपती धरती और झुलसते जनजीवन को राहत दे सकें।
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