हाल-ए-जच्चा-बच्चा अस्पतालः फ्री उपचार के नाम पर हो रहा मजाक

Edited By swetha,Updated: 26 Jun, 2019 09:30 AM

civil hospital jalandhar

भीषण पड़ रही गर्मी से जहां तंदरुस्त आदमी बीमार हो रहे हैं तो सिविल अस्पताल में दाखिल मरीजों का हाल क्या होता होगा, जब मरीजों के लिए लगे ए.सी. तथा पंखे खराब होने के साथ ही वार्ड में बदबू आती हो। और तो और, इस बारे में जब मरीज स्टाफ को शिकायत करता है...

जालंधर(शौरी): भीषण पड़ रही गर्मी से जहां तंदरुस्त आदमी बीमार हो रहे हैं तो सिविल अस्पताल में दाखिल मरीजों का हाल क्या होता होगा, जब मरीजों के लिए लगे ए.सी. तथा पंखे खराब होने के साथ ही वार्ड में बदबू आती हो। और तो और, इस बारे में जब मरीज स्टाफ को शिकायत करता है तो मरीज की बेइज्जती की जाती है। इससे मरीज के दिल पर क्या बीतती है, यह मरीज ही जानता है। ऐसे में मरीजों का फ्री उपचार करने के नाम पर सिर्फ मजाक हो रहा है। 

सिविल अस्पताल में लाखों खर्च कर नई बने जच्चा-बच्चा अस्पताल की इमारत का हाल बेहाल हो चुका है। अस्पताल प्रशासन द्वारा ध्यान न देने के कारण गर्भवती महिलाओं के वार्ड में लगे ए.सी. खराब हो चुके हैं और पंखे हवा देने के स्थान पर शोपीस बन चुके हैं। मरीजों का कहना है कि गर्मी व उमस में वार्ड में रहने को दिल नहीं करता, लेकिन आॢथक तौर पर कमजोर होने के कारण वे प्राइवेट अस्पताल का खर्चा नहीं उठा सकते, इस कारण उन्हें यहां परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

वहीं विडम्बना यह है कि मरीजों के कमरे में लगे ए.सी. खराब पड़े हैं, जबकि स्टाफ के ए.सी. चल रहे हैं। जच्चा-बच्चा अस्पताल के ग्राऊंड फ्लोर में स्टाफ के कमरे में लगा ए.सी. इतनी कूङ्क्षलग दे रहा था कि स्टाफ को दरवाजा खोल कर बैठना पड़ रहा था। इतना ही नहीं, स्टाफ के कमरे में पानी पीने के लिए आर.ओ. लगा हुआ था, वहीं मरीजों के लिए लगा पानी वाला कूलर स्टोर रूम में खराब होने के कारण रख दिया गया था और उक्त कूलर को ठीक करवाना किसी ने मुनासिब नही समझा।

बधाई हो बधाई, बेटा पैदा हुआ है
वैसे तो सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पताल में डिलीवरी फ्री कर रखी है, लेकिन जच्चा-बच्चा अस्पताल में कुछ स्टाफ को यह बात हजम नहीं हो रही। डिलीवरी के बाद मरीजों से बधाई लेने का सिलसिला जारी है और बेटा होने पर बधाई के नाम पर 2 से 3 हजार रुपए स्टाफ धक्के से वसूल लेता है।एक महिला मरीज के पति ने बताया कि उसके घर बेटा पैदा हुआ तो डिलीवरी के बाद स्टाफ ने 2 हजार का नोट लिए बगैर बेटा उसे दिया ही नहीं और बोला कि यदि वह प्राइवेट अस्पताल में अपनी पत्नी की डिलीवरी करवाते तो 25 हजार से ऊपर राशि उनकी खर्च होती थी, लेकिन 2 हजार रुपए जेब से निकालना उन्हें कठिन लग रहा है।गौर हो कि इसी वार्ड में कुछ माह पहले एक महिला के बेटा हुआ था और दूसरी महिला को बेटी पैदा हुई थी, लेकिन स्टाफ ने बधाई के चक्कर में अदला-बदली कर बधाई ले ली और बाद में हंगामा हुआ, क्योंकि महिला को होश आया तो उसने अपनी सास को बताया था कि उसकी कोख से तो बेटा पैदा हुआ और स्टाफ ने बेटी उन्हें थमा दी। हालांकि मामला थाना- 4 की पुलिस के पास पहुंचा तो बाद में मामला तभी शांत हुआ जब उस महिला को उसका बेटा वापस मिला।

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