PU से जुड़े कॉलेजों में अनियमितताओं पर पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर जिम्मेदार- प्रो. तरुण घई

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 09 May, 2026 06:15 PM

the vice chancellor of punjab university is fully responsible for irregularities

आज एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड कॉलेज पंजाब और चंडीगढ़ के महासचिव प्रो. जसपाल सिंह को पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा कॉलेजों से प्राप्त वह रिकॉर्ड सौंपा गया, जिसमें किन-किन कालेजों ने 7वें वेतन आयोग को लागू किया है, यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार पी.एफ. कटौती...

जालंधर : आज एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड कॉलेज पंजाब और चंडीगढ़ के महासचिव प्रो. जसपाल सिंह को पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा कॉलेजों से प्राप्त वह रिकॉर्ड सौंपा गया, जिसमें किन-किन कालेजों ने 7वें वेतन आयोग को लागू किया है, यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार पी.एफ. कटौती तथा शिक्षकों को सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाने संबंधी जानकारी शामिल थी। हैरानी की बात यह है कि पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा 210 संबद्ध कॉलेजों में से मात्र 138 कॉलेजों की जानकारी उपलब्ध करवाई गई।

एसोसिएशन के प्रधान प्रो. तरुण घई ने बताया कि दिसंबर 2025 में वाइस चांसलर डा. रेनू विग से हमारी एसोसिएशन की मीटिंग में हमने ये सारा रिकॉर्ड उनसे मांगा था। रिकॉर्ड के अनुसार, इन 138 कॉलेजों में से केवल 18 कॉलेजों ने पंजाब और चंडीगढ़ में गैर-सहायता प्राप्त पदों पर कार्यरत अध्यापकों को 7वां वेतन आयोग लागू किया है जिससे पता चलता है कि किस तरह हज़ारों कॉलेज अध्यापकों का आर्थिक शोषण कॉलेज मैनेजमेंटों द्वारा किया जा रहा है। दुखद पहलू यह है कि इन 18 कॉलेजों में भी अधिकांश कॉलेजों में पूर्ण डी.ए., पीएफ तथा 28.09.2022 से एरियर जिस दिन पंजाब सरकार ने 7वें वेतन आयोग की अधिसूचना जारी की थी अब तक नहीं दिया गया है।

प्रो. घई ने बताया कि यह भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकांश कॉलेज हर वर्ष 2010 से छात्रों से रिटायरल बेनिफिट फंड के नाम पर लाखों रुपये वसूलने के बावजूद शिक्षकों को ₹20 लाख की ग्रेच्युटी तक प्रदान नहीं कर रहे हैं और न ही बहुत सारे कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी नियमों के अनुसार इन पैसों का अलग से बैंक अकाउंट खुलवाया है।

तरुण घई ने कहा कि हमारा संगठन कॉलेज प्रबंधन समितियों के इस गैर-जिम्मेदाराना और अध्यापकों का आर्थिक शौषण करने के रवैये की कड़ी निंदा करता है। साथ ही हम पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डा. रेनू विग तथा कार्यवाहक रवि इंदर सिंह को भी इस मामले में लगातार निष्क्रिय बने रहने के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।

प्रो. जसपाल सिंह ने बताया कि यदि तुरंत प्रभाव से पंजाब यूनिवर्सिटी की तरफ से इन कॉलेजों पर सख्त कार्यवाही नहीं की गई तो हमारा संगठन पंजाब यूनिवर्सिटी की निष्क्रियता के खिलाफ जल्द ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होगा।

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