Edited By VANSH Sharma,Updated: 23 Jun, 2026 11:56 PM

सुप्रीम कोर्ट में नए जजों की नियुक्ति के दौरान जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया के नाम पर विचार न किया जाना इस समय न्यायपालिका में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जालंधर (जतिंदर): सुप्रीम कोर्ट में नए जजों की नियुक्ति के दौरान जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया के नाम पर विचार न किया जाना इस समय न्यायपालिका में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, जस्टिस संधावालिया से वरिष्ठता में जूनियर जजों को पदोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जस्टिस संधावालिया के नाम पर विचार न किए जाने का कोई कारण भी नहीं बताया गया।
जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया इस समय हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं। इससे पहले वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 के बाद से सुप्रीम कोर्ट में कोई सिख जज नहीं है।
जस्टिस संधावालिया को एक ईमानदार और न्यायप्रिय छवि वाले जज के रूप में देखा जाता है। वे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति के महत्वपूर्ण सदस्य भी रह चुके हैं। ऐसे में, एक वरिष्ठ जज के नाम पर पदोन्नति के समय विचार न किए जाने से न्यायपालिका की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जस्टिस संधावालिया के नाम पर विचार न किए जाने के घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील ए.एस. कौमी ने कहा कि जस्टिस संधावालिया के नाम पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह दो सिख वकीलों के नामों पर दोबारा विचार के बाद उन्हें हाईकोर्ट का जज बनाया गया, उसी तरह इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि जस्टिस संधावालिया के नाम पर भी सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में दोबारा विचार किया जाए।
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