बरनाला कांग्रेस में बदलते राजनीतिक समीकरण: एक तरफ चन्नी से मुलाकातें, दूसरी तरफ वड़िंग की 'टीम बरनाला'

Edited By Vatika,Updated: 11 Jul, 2026 09:38 AM

shifting political equations within the barnala congress

पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी हालात इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां प्रदेश नेतृत्व के आपसी मतभेदों का असर अब

बरनाला(विवेक सिंधवानी): पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी हालात इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां प्रदेश नेतृत्व के आपसी मतभेदों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ देखने को मिल रहा है। राज्य स्तर पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान की आंच अब बरनाला जिले तक पहुंच चुकी है। बीते दिनों पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष न बनाए जाने के विरोध में उनके आवास पर हुए एक बड़े इकट्ठ (जमावड़े) के बाद, बरनाला कांग्रेस के राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। जिले के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता अब दो अलग-अलग धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं।

चन्नी के पक्ष में उतरे विधायक काला ढिल्लों
बरनाला की राजनीति में हलचल उस समय बढ़ गई जब मौजूदा हल्का विधायक और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह काला ढिल्लों खुलकर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। बीते दिनों काला ढिल्लों ने अपने समर्थकों के एक बड़े काफिले के साथ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से उनके आवास पर जाकर विशेष मुलाकात की। इस मुलाकात ने जिले के भीतर चन्नी समर्थकों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

राजा वड़िंग का 'टीम बरनाला' के जरिए सोशल मीडिया संदेश
दूसरी तरफ, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी जिले में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत रखने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं। काला ढिल्लों और चन्नी के गठबंधन के जवाब में राजा वड़िंग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर 'टीम बरनाला' के नाम से एक पोस्ट साझा की है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। इस तस्वीर में राजा वड़िंग के साथ जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मक्खन शर्मा, वरिष्ठ नेता जगजीत धौला, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेश लोटा और यूथ कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष गुरकीमत सिद्धू जैसे प्रमुख चेहरे मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस पोस्ट के जरिए राजा वड़िंग ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले का पारंपरिक और युवा नेतृत्व अभी भी प्रदेश अध्यक्ष के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।

आम कार्यकर्ताओं में बढ़ी दुविधा
नेताओं के बीच चल रही इस अंदरूनी खींचतान ने जमीनी स्तर के आम कार्यकर्ताओं को बड़ी दुविधा में डाल दिया है। एक तरफ मौजूदा विधायक और जिला अध्यक्ष काला ढिल्लों हैं, जिनके पास संगठनात्मक शक्ति है, जबकि दूसरी तरफ मक्खन शर्मा, महेश लोटा और गुरकीमत सिद्धू जैसे नेता हैं जिनका इलाके में अपना निजी जनाधार है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी जिले में ब्लॉक अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष अलग-अलग धड़ों में नजर आएं, तो पार्टी की एकजुटता को ठेस पहुंचना लाजिमी है। आने वाले स्थानीय और पंचायती चुनावों के मद्देनजर यह स्थिति कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस हाईकमांड इस बढ़ती दूरी को कम करने के लिए क्या कदम उठाती है।

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