बरनाला में हाहाकार, कांग्रेस-भाजपा एक ही मंच पर, गुस्से में सड़कों पर उतरे लोग

Edited By Urmila,Updated: 28 Jun, 2026 09:19 AM

uproar over water in barnala

गर्मी की तपिश में जब घरों की टोंटियां सूख जाएं और बच्चे पानी के लिए तरसें, तो सब्र का बांध टूटना स्वाभाविक है।

बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि) : गर्मी की तपिश में जब घरों की टोंटियां सूख जाएं और बच्चे पानी के लिए तरसें, तो सब्र का बांध टूटना स्वाभाविक है। बरनाला के शहीद भगत सिंह पार्क और वार्ड-29 के वासियों के साथ यही हुआ। कई दिनों से ट्यूबवेल बंद पड़े हैं, पानी की सप्लाई ठप है और नगर निगम के अधिकारी कानों पर जूं नहीं रेंगने दे रहे। आखिरकार थके-हारे वासियों ने केसी रोड बरनाला पर रोड जाम लगाकर अपना रोष प्रकट किया।

बलॉक कांग्रेस के अध्यक्ष महेश लोटा इस धरने की अगुवाई करने वालों में सबसे आगे थे। उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह पार्क में पानी के ट्यूबवेल की सप्लाई बंद होने के कारण पार्क में लगे पौधों को पानी देना मुश्किल हो गया है और घरों की सप्लाई भी बंद हो चुकी है।  वार्ड-29 में भी पिछले दो दिनों से ट्यूबवेल की सप्लाई पूरी तरह ठप है। लोटा ने कहा — "सरकार की तरफ से लोगों को सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कुछ नहीं। इतनी गर्मी में पानी बंद होना लोगों के साथ सीधा अन्याय है।"

भाजपा ने भी उठाई आवाज — नरिंदर गर्ग नीटा का सवाल

धरने में भाजपा के जिला जनरल सचिव नरिंदर गर्ग नीटा ने भी शिरकत की और स्पष्ट शब्दों में कहा कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए शहरवासियों को सड़कों पर उतरना पड़े — यह नगर निगम की सबसे बड़ी विफलता है। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं—पानी हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि यह अधिकार सुनिश्चित किया जाए। गर्ग नीटा की मौजूदगी इस बात का संकेत था कि पानी की समस्या अब किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं रही—यह पूरे शहर की साझी मांग बन चुकी है।

विधायक काला ढिल्लों की चेतावनी, हल न हुआ तो बड़ा प्रदर्शन

धरने में पहुंचे कांग्रेसी विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों ने शहरवासियों के साथ सड़क पर बैठकर अपनी एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या सबसे बड़ी समस्या है और बंद पड़े ट्यूबवेलों को तुरंत चालू किया जाना चाहिए। विधायक ने साफ शब्दों में चेतावनी दी, "अगर जल्द से जल्द इस समस्या का हल नहीं किया गया तो हम शहरवासियों के साथ मिलकर और बड़ा प्रदर्शन करेंगे और संघर्ष को और तेज किया जाएगा।"

सियासी बंटवारा भूलकर एक हुए लोग

इस धरने की सबसे खास बात यह रही कि कांग्रेस और भाजपा के नेता एक ही मंच पर एक ही मुद्दे के लिए एकसाथ दिखे। यह दृश्य बताता है कि पानी की समस्या ने सियासी विभाजन की लकीरें मिटा दी हैं। अब गेंद नगर निगम और प्रशासन के पाले में है — क्या वे जल्द कार्रवाई करेंगे या इंतजार करेंगे कि यह रोष और बड़े आंदोलन का रूप धारण करे?

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