निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर पंजाब सरकार का शिकंजा,  90 दिन पहले देनी होगी सूचना

Edited By Kamini,Updated: 10 Sep, 2026 12:08 PM

punjab government strict on fee hike of private schools

पंजाब में निजी स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। पंजाब सरकार ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ एनऐडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 को नोटिफाई कर दिया है

पंजाब डेस्क:  पंजाब में निजी स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। पंजाब सरकार ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ एनऐडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 को नोटिफाई कर दिया है। नए कानून के तहत निजी स्कूल एक शैक्षणिक वर्ष में सामान्य तौर पर फीस में 5 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे।

फीस में बढ़ोतरी करने से पहले स्कूलों को इसकी सूचना स्कूल परिसर और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कम से कम 90 दिन पहले देनी होगी। इसके अलावा प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से कम से कम 180 दिन पहले रेगुलेटरी बोर्ड के पास भेजना होगा। बोर्ड की लिखित मंजूरी मिलने तक फीस बढ़ोतरी लागू नहीं की जा सकेगी।

अतिरिक्त फीस वसूली तो 30 दिन में करनी होगी वापस

नए नियमों के मुताबिक, यदि रेगुलेटरी बोर्ड किसी स्कूल को अतिरिक्त फीस वापस करने का आदेश देता है और स्कूल 30 दिन के भीतर रकम वापस नहीं करता, तो उस पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। फीस वापस नहीं करने की स्थिति में स्कूल की रिकॉग्नाइजेशन और एफिलिएशन वापस लेने की कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि, ऐसी कार्रवाई से पहले स्कूल को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाएगा।

90 दिन में लौटानी होगी अतिरिक्त वसूली गई फीस

कानून में पिछले 36 महीनों की फीस वृद्धि को भी ध्यान में रखा गया है। यदि स्कूल की कुल फीस वृद्धि संबंधित शैक्षणिक वर्ष की फीस की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक रही है, तो निर्धारित सीमा से अधिक वसूली गई राशि प्रभावित छात्र या उसके अभिभावक को 90 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। एक साल पढ़ने वाले छात्र के लिए 5 प्रतिशत और 2 साल पढ़ने वाले छात्र के लिए 10 प्रतिशत की प्रमीसिबल कम्यूलेटिव सीलिंग के आधार पर रिफंड की गणनी होगी। 

किताबों के लिए कम से कम 3 वेंडरों की सूची जरूरी

निजी स्कूलों की ओर से किताबों और स्टेशनरी को लेकर की जाने वाली मनमानी पर भी रोक लगाई गई है। स्कूलों को प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम 3 पब्लिशर या वेंडरों की सूची स्कूल परिसर और वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी। अभिभावक अपनी पसंद के किसी भी पब्लिशर या वेंडर से किताबें खरीद सकेंगे। स्कूल किसी एक दुकान या पब्लिशर से किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं डाल सकेगा।

मनमानी फीस वसूली पर बढ़ी पेनल्टी

नए एक्ट में फीस नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की राशि भी बढ़ाई गई है। पहले 30 हजार, 50 हजार और 1 लाख रुपये तक की पेनल्टी के प्रावधान थे, जिन्हें बढ़ाकर क्रमशः 50 हजार, 1 लाख और 2 लाख रुपये कर दिया गया है। अपील के स्तर पर यह राशि 1 लाख, 3 लाख और 5 लाख रुपये तक हो सकती है। रेगुलेटरी बोर्ड के आदेश से असंतुष्ट स्कूल या प्रभावित व्यक्ति 45 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। नए प्रावधानों से अभिभावकों को फीस और किताबों के नाम पर होने वाली मनमानी से राहत मिलने की उम्मीद है।

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