Edited By Kamini,Updated: 02 Sep, 2026 02:04 PM

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब कैडर के IAS अधिकारी को समन जारी किया है।
पंजाब डेस्क: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब कैडर के IAS अधिकारी को समन जारी किया है। मिली जानकारी के मुताबिक, ED ने पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ IAS अधिकारी अनुराग वर्मा को एक बार फिर समन जारी किया है। इसमें अनुराग वर्मा को 7 सितंबर को जालंधर स्थित रीजनल ऑफिस में पेश होने के लिए कहा गया है। ये समन मोहाली की सनटेक सिटी और ऑल्टस स्पेस बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े घोटाले की जांच के सिलसिले में किया गया है।
इससे पहले अनुराग वर्मा को ED ने 31 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालांकि, वह उस दिन पेश नहीं हुए और जांच एजेंसी से जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए समय मांगा था। इसके बाद ED ने उन्हें 7 सितंबर की नई तारीख दी है। इस मामले में अनुराग वर्मा दूसरे वरिष्ठ पंजाब-कैडर IAS अधिकारी हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। इससे पहले 2007 बैच की IAS अधिकारी और मौजूदा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव कंवलप्रीत बराड़ से भी ED 2 बार पूछताछ कर चुकी है।
कंवलप्रीत बराड़ पहली बार 18 अगस्त को ED के जालंधर कार्यालय में पूछताछ के लिए पेश हुई थीं। इसके बाद उन्हें अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ 27 अगस्त को दोबारा बुलाया गया, जहां उनसे 7 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। ED की जांच का केंद्र मोहाली के सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट्स से जुड़े प्रशासनिक फैसले हैं।
कंवलप्रीत बराड़ वर्ष 2024 में डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पद पर तैनात थीं। इसी दौरान लिए गए कुछ प्रशासनिक फैसलों की अब ED जांच कर रही है। ED उन शिकायतों की भी जांच कर रही है, जिनमें जमीन मालिकों की सहमति से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
वहीं, अनुराग वर्मा उस अवधि के दौरान पंजाब के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख रहे, जब अब जांच के घेरे में आए कई प्रशासनिक फैसले लिए गए थे। उनसे CLU मंजूरी, प्रोजेक्ट लेआउट में बदलाव और संबंधित फाइलों की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर पूछताछ किए जाने की संभावना है।
मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नवंबर 2022 में मुल्लांपुर थाने में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुआ था। इसमें रियल एस्टेट कारोबारी अजय सहगल और इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी से जुड़े अन्य लोगों पर जमीन मालिकों और ग्राहकों के साथ कथित धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।
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