Edited By Vatika,Updated: 12 Sep, 2026 11:52 AM

किला रायपुर में अमेरिकी एनआरआई महिला रूपिंदर कौर के सनसनीखेज अंधे कत्ल मामले में पुलिस ने कानूनी
लुधियाना (राज) : किला रायपुर में अमेरिकी एनआरआई महिला रूपिंदर कौर के सनसनीखेज अंधे कत्ल मामले में पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसते हुए मुख्य आरोपियों में शामिल दानिश उर्फ दिनेश कुमार के खिलाफ अदालत मेंचार्जशीट पेश कर दिया है। इसके साथ ही यूके में बैठे एनआरआई चरणजीत सिंह और अन्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
वहीं दूसरी ओर, इस हाई-प्रोफाइल मामले की तफ्तीश में भारी फर्जीवाड़ा करने और एक मृत व्यक्ति के झूठे बयान दर्ज करने के संगीन आरोप में पूर्व एसएचओ और हेड कांस्टेबल को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जानकारी देते हुए एडीसीपी करनवीर सिंह ने बताया कि एनआरआई महिला रूपिंदर कौर हत्याकांड में नामजद आरोपी दानिश उर्फ दिनेश कुमार के खिलाफ पुलिस जांच मुकम्मल कर ली गई है। पुलिस ने उसके खिलाफ ठोस सबूत जुटाते हुए अदालत के समक्ष विस्तृत चालान दाखिल कर दिया है। एडीसीपी ने स्पष्ट किया कि मामले में नामजद यूके आधारित एनआरआई चरणजीत सिंह, मनवीर सिंह उर्फ मनी पहलवान और अन्य के खिलाफ गहन तफ्तीश बदस्तूर जारी है। यूके में बैठे आरोपी चरणजीत सिंह को कानून के शिकंजे में लाने और प्रत्यर्पण से संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर भी तेजी से काम चल रहा है।
इसके साथ ही इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच के दौरान भारी लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले पुलिसकर्मियों पर पुलिस कमिश्नरेट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने जांच में झूठे सुबूत गढऩे और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोपी तत्कालीन एसएचओ डेहलों सुखजिंदर सिंह और हेड कांस्टेबल संजीव कुमार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। हालांकि, पूर्व एसएचओ और हेड कांटेबल पर मई में केस दर्ज कर सस्पैंड किया गया था और नौकरी से बर्खास्त की कार्रवाई जून महीने में कर दी गई थी। एडीसीपी करनवीर सिंह के अनुसार, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (स्ढ्ढञ्ज) की जांच रिपोर्ट में दोनों मुलाजिमों द्वारा गढ़े गए झूठे बयानों और रिकॉर्ड में हेराफेरी की पुष्टि होने के बाद यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
हाईकोर्ट की सख्ती और एसआईटी की जांच में खुली थी पोल
मामले में नामजद एक अन्य आरोपी मनवीर सिंह द्वारा पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद यह फर्जीवाड़ा न्यायिक जांच के दायरे में आ गया। हाईकोर्ट के जस्टिस सुमीत गोयल ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए स्पेशल डीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) को हलफनामे के साथ विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए थे। अदालत के कड़े रुख के बाद पंजाब पुलिस द्वारा गठित एसआईटी ने जब पूरे मामले की पड़ताल की, तो तत्कालीन एसएचओ सुखजिंदर सिंह और उनके साथी हेड कांस्टेबल द्वारा की गई यह जालसाजी बेनकाब हो गई। जिसके बाद उन पर ऐसी कार्रवाई की गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।