पंजाब में नशे की दवाओं का कारोबार! छोटे दुकानदारों पर शिकंजा, बड़े खिलाड़ियों पर सवाल

Edited By Kalash,Updated: 27 Oct, 2026 01:14 PM

medical stores health department

पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही मुहिम के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा छोटे-छोटे मेडिकल स्टोरों की तो लगातार जांच की जा रही है।

अमृतसर (दलजीत): पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही मुहिम के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा छोटे-छोटे मेडिकल स्टोरों की तो लगातार जांच की जा रही है। कई जगहों पर नियमों के विपरीत रखी या बेची जा रही ऐसी दवाएं भी बरामद हो रही हैं, जिनका नशे के रूप में दुरुपयोग होने की संभावना रहती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि इस ‘खेल’ में शामिल बड़े ‘खिलाड़ियों’ पर कार्रवाई कब होगी। विभागीय कार्रवाइयों से अवैध बिक्री पर लगाम लगाने की कोशिश तो हो रही है लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी सामने आ रहा है, जो दवा आखिरकार गलत हाथों तक पहुंच रही है, उसकी शुरुआत कहां से हुई और उसकी सप्लाई चेन की जांच कितनी गहराई तक हो रही है?

जानकारी के अनुसार पिछले कुछ महीनों में पंजाब के विभिन्न जिलों में हुई जांचों के दौरान कई मेडिकल स्टोरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है लेकिन विशेषज्ञों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि सिर्फ रिटेल स्तर पर कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। दवा निर्माता, थोक विक्रेता, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर हर चरण की बिक्री और खरीद का विवरण आपस में जोड़ना जरूरी है।

भारत सरकार के एन.सी.बी. विभाग द्वारा तो नशे की चेन तोड़ने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है और कई बड़े केस भी सुलझाए गए हैं लेकिन पंजाब पुलिस प्रशासन को भी अमृतसर सहित अन्य इलाकों में कुछ मेडिकल स्टोरों पर पिछले समय के दौरान हुई बरामदगी की तह तक जाने के लिए और अधिक गहराई से जांच करने की जरूरत है। इतना ही नहीं पिछले समय के दौरान कटड़ा शेर सिंह होलसेल मार्कीट में एक संस्थान से पकड़ी गई नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के संबंध में पूछताछ का संबंधित संस्थान के मालिक द्वारा विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया गया।

एक्ट में दवाओं की बिक्री के लिए सख्त नियम

'ड्रग एंड कॉस्मैटिक एक्ट 1940' और इसके अधीन बने नियम (1945) में दवाओं के निर्माण, बिक्री, स्टोरेज और वितरण संबंधी विस्तृत प्रावधान हैं। 'शेड्यूल एच' में दर्ज दवाओं की बिक्री के लिए डॉक्टर की वैध पर्ची संबंधी नियम लागू होते हैं और ऐसी दवाओं के पैक पर निर्धारित चेतावनी दर्ज होती है। इसके अलावा 'शेड्यूल एच-1' में दर्ज दवाओं की बिक्री के लिए अतिरिक्त रिकॉर्ड रखने की शर्तें हैं जबकि 'शेड्यूल एक्स'के तहत आने वाली दवाओं के लिए और भी सख्त नियम लागू होते हैं।

इसलिए यदि किसी मैडीकल स्टोर से नियमों का उल्लंघन करके दवा मिलती है तो कार्रवाई सिर्फ दुकानदार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उस दवा की खरीद कहां से हुई, किस डिस्ट्रीब्यूटर ने दी, डिस्ट्रीब्यूटर को माल किस कंपनी या थोक संस्थान ने भेजा और उससे पहले निर्माता द्वारा कितनी मात्रा तैयार की गई, यह सारा रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आना चाहिए।

केंद्र बनाए एक पोर्टल, हर गोली का हो हिसाब

नशे के रूप में दुरुपयोग होने वाली दवाओं की अवैध बिक्री को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को जोड़कर एक राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल तैयार करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस पोर्टल पर दवा बनाने वाली कंपनी द्वारा तैयार की गई मात्रा, इस्तेमाल किया गया कच्चा माल, विभिन्न राज्यों और जिलों को भेजा गया स्टॉक तथा बची हुई मात्रा का विवरण दर्ज होना चाहिए। इससे आगे संबंधित जिले का अधिकारी यह जांच सकेगा कि किस संस्थान को कितनी दवा मिली और उस संस्थान ने किस मैडीकल स्टोर को कितना माल भेजा। रिटेल स्तर पर भी दवा की बिक्री को मरीज, डाक्टर की पर्ची और बेची गई मात्रा से जोड़ा जाए। इस प्रकार किसी भी स्तर पर रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आने पर सप्लाई चेन के पिछले चरणों तक पहुंचना संभव होगा।

सिर्फ छापामारी करने से नहीं, सप्लाई चेन पर प्रहार से रुकेगा गलत इस्तेमाल

विशेषज्ञों के अनुसार तकनीक की मदद से दवाओं की आवाजाही को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जा सकता है। जब निर्माता से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक हर चरण का रिकॉर्ड एक ही प्रणाली में उपलब्ध होगा, तो अनावश्यक या संदिग्ध मात्रा की बिक्री को समय रहते पहचाना जा सकेगा। इससे ईमानदारी से कारोबार करने वाले दवा विक्रेताओं को भी अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय होगी।

कानून सिर्फ बिक्री करने वाले स्तर तक सीमित नहीं

एडवोकेट साई किरन परिंजा ने कहा कि ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट और इसके तहत बने नियमों में दवाओं के निर्माण, बिक्री, वितरण और रिकॉर्ड के रखरखाव संबंधी विभिन्न जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। यदि किसी दवा की नियमों के विपरीत बिक्री या सप्लाई सामने आती है, तो जांच को सिर्फ अंतिम विक्रेता तक सीमित करने के बजाय उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरी सप्लाई चेन की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजीटल रिकॉर्ड से जांच प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बन सकती है।

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