Edited By Urmila,Updated: 04 Aug, 2026 10:36 AM

यह मामला अमृतसर की श्री दुर्गा पब्लिसिटी कंपनी से जुड़ा है। इस कंपनी के पास कभी जालंधर शहर के तमाम विज्ञापनों का ठेका हुआ करता था।
जालंधर (खुराना): जालंधर नगर निगम को एक बड़े कानूनी मामले में तगड़ा झटका लगा है। स्थानीय अदालत ने हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान मॉडल टाऊन स्थित नगर निगम के मेयर हाऊस और इंडियन ओवरसीज बैंक में स्थित नगर निगम के एक बैंक खाते को अटैच (कुर्क) करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत के इस आदेश के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार निगम के कानूनी विशेषज्ञ इन आदेशों को हटवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
यह मामला अमृतसर की श्री दुर्गा पब्लिसिटी कंपनी से जुड़ा है। इस कंपनी के पास कभी जालंधर शहर के तमाम विज्ञापनों का ठेका हुआ करता था। कई वर्ष पहले कंपनी ने नगर निगम के खिलाफ मामला दायर किया था। उस समय नगर निगम लोअर कोर्ट, सैशन कोर्ट और हाईकोर्ट में यह मामला जीत गया था। इसके बाद कंपनी सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से आर्बिट्रेशन में चली गई।
बताया जाता है कि आर्बिट्रेशन की कार्रवाई के दौरान नगर निगम अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख सका, जिसके बाद आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने नगर निगम को कंपनी को लगभग 21 करोड़ रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया।
बताया जा रहा है कि इसी आर्बिट्रेशन फैसले को लागू कराने के लिए श्री दुर्गा पब्लिसिटी ने जालंधर की अदालत का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निगम के इंडियन ओवरसीज बैंक स्थित एक खाते को अटैच करने के साथ-साथ मॉडल टाऊन स्थित मेयर हाऊस को भी अटैच करने के आदेश जारी कर दिए।
इस बीच नगर निगम ने आर्बिट्रेशन के फैसले को चंडीगढ़ की अदालत में चुनौती दी हुई है, जहां मामला अभी विचाराधीन है। बताया गया कि अब तक श्री दुर्गा पब्लिसिटी को किसी कारणवश समन जारी नहीं हो पा रहे थे। सोमवार को चंडीगढ़ में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम के प्रतिनिधियों ने बाय-हैंड समन प्राप्त कर लिए, जिन्हें अब जालंधर की अदालत के माध्यम से कंपनी को तामील कराया जाएगा।
उधर, नगर निगम के सामने एक और बड़ा मामला भी लंबित है। जानकारी के अनुसार, सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट का कार्य करने वाली जिंदल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी भी आर्बिट्रेशन में गई थी, जहां नगर निगम के खिलाफ करीब 204 करोड़ रुपए के हर्जाने का आदेश पारित हुआ। बताया जा रहा है कि इस मामले में भी नगर निगम के कुछ बैंक खाते अटैच हैं।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में नगर निगम के 5 से 6 बैंक खाते विभिन्न अदालती आदेशों के कारण अटैच हैं, जिनमें करीब 22 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं। इसके चलते नगर निगम आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। जबकि दूसरी ओर नगर निगम पहले से ही करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपए के विकास कार्यों, टैंडरों और वर्क ऑर्डर जारी कर चुका है।
निगम द्वारा काटे कई चैक हुए फेल, कर्मचारियों ने दिया धरना
नगर निगम के डी.सी.एफ.ए. कार्यालय में सोमवार को मिनिस्ट्रियल स्टाफ यूनियन के सदस्यों ने विक्की सहोता के नेतृत्व में रोष धरना दिया। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि अदालती आदेशों के कारण नगर निगम के बैंक खाते अटैच होने से कर्मचारियों के वेतन का भुगतान प्रभावित हुआ है। यूनियन के अनुसार, हाल ही में निगम के फाइनैंस डिपार्टमैंट ने इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते से कर्मचारियों के वेतन और कुछ ठेकेदारों के भुगतान के लिए चैक जारी किए थे, लेकिन बैंक खाता अटैच होने के बाद सभी चैक वापस लौट आए। इनमें कर्मचारियों के वेतन संबंधी चैक भी शामिल थे।
हालांकि निगम अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदारों को अन्य खातों से नए चैक जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि जिस खाते को अटैच किया गया है, उसमें अधिक राशि नहीं थी। वहीं शहर के विज्ञापनों का ठेका लेने वाली क्रिएटिव कंपनी से नगर निगम को हाल ही में 1.14 करोड़ रुपए का चैक प्राप्त हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि कर्मचारियों के वेतन का भुगतान प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। फिर भी बैंक खातों के अटैच होने और लगभग 22 करोड़ रुपए फंसे रहने से नगर निगम की आर्थिक स्थिति को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में चिंता बनी हुई है।
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