Edited By Vatika,Updated: 20 Jun, 2026 12:01 PM

प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement - ED) ने देश की अर्थव्यवस्था को चूना लगाने वाले एक बहुत बड़े
लुधियाना (राज): प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement - ED) ने देश की अर्थव्यवस्था को चूना लगाने वाले एक बहुत बड़े और हाई-प्रोफाइल वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश किया है। ईडी के सहायक निदेशक (Assistant Director) सूरज कुमार यादव (प्रवर्तन भवन, नई दिल्ली) से प्राप्त एक मुख्य इनपुट और आधिकारिक शिकायत संख्या 1364/जोन-4 (दिनांक 19.06.2026) के बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने देशव्यापी स्तर पर चल रहे फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग (धोखाधड़ी) के इस काले नेटवर्क के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
3089.57 करोड़ रुपए से अधिक के फंड की हेराफेरी
इस नेटवर्क द्वारा फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए करीब 3089.57 करोड़ रुपए से अधिक के फंड की हेराफेरी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में सामने आया है कि इस महाघोटाले के पीछे एक बेहद शातिर संगठित गिरोह काम कर रहा था। यह पूरा नेटवर्क संदिग्ध लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी की नीयत से चलाया जा रहा था। इस गिरोह ने चालाकी दिखाते हुए कई फर्जी शेल कंपनियां और संस्थाएं खड़ी कीं। हैरानी की बात यह है कि इन सभी संदिग्ध संस्थाओं में एक जैसे पते, फोन नंबर और ईमेल-आईडी का इस्तेमाल किया गया था। इस गिरोह का मुख्य मकसद जाली जीएसटी इनवॉइसिंग (faked GST invoicing) तैयार करना और बड़े पैमाने पर बैंकों से नकद (कैश) निकासी करके भारी-भरकम फंड इकट्ठा करना था। ईडी और स्थानीय पुलिस की तफ्तीश में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, उसके अनुसार आरोपियों ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) की अलग-अलग शाखाओं में खुले एपीएमसी (कृषि उपज विपणन समिति / APMC) के आधिकारिक बैंक खातों को निशाना बनाया।
करोड़ों रुपए की संदिग्ध धोखाधड़ी
इन कृषि खातों से बड़ी चालाकी के साथ कुल 3089.57 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर और विड्रॉ की गई। इसके अलावा देश के कई अन्य प्रतिष्ठित बैंकों के खातों से भी इसी तरह की करोड़ों रुपए की संदिग्ध धोखाधड़ी की गई है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है। इस महाघोटाले में पुलिस और वित्तीय जांच एजेंसियों ने मुख्य मास्टरमाइंडों और उनके करीबियों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए कई लोगों को नामजद किया है। प्राथमिकी (FIR) में नामजद मुख्य आरोपियों में अमित कुमार गोयल, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल, गुरदीप सिंह, बलवंत सिंह सहित कई अन्य अज्ञात व्यक्ति और फर्जी व्यावसायिक संस्थाएं शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस और ईडी की टीमों ने आरोपियों के पैन विवरण और अन्य दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनके तमाम बैंक खातों को सीज (फ्रीज) करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में देश के कुछ बड़े व्यापारियों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। आरोपियों के खिलाफ नए कानून और वित्तीय धोखाधड़ी रोधी अधिनियमों के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि देश की मंडियों और कृषि खातों के नाम पर लूटा गया यह 3000 करोड़ से अधिक का काला धन कहां-कहां खपाया गया है और इस नेटवर्क के तार किन-किन बड़े चेहरों से जुड़े हैं।