बठिंडा के जीदा ब्लास्ट मामले से जुड़ी बड़ी खबर, अब तक की जांच में हुए बड़े खुलासे

Edited By Kalash,Updated: 13 Nov, 2025 06:05 PM

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यह वही मामला है जिसमें एक कानून के छात्र गुरप्रीत सिंह के 'फिदायीन हमले' की तैयारी में जुटे होने का संदेह जताया गया था।

बठिंडा (विजय वर्मा): जिले के जीदा गांव में दो माह पूर्व हुए दोहरे विस्फोट के मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपने हाथों में ले ली है। यह वही मामला है जिसमें एक कानून के छात्र गुरप्रीत सिंह के 'फिदायीन हमले' की तैयारी में जुटे होने का संदेह जताया गया था। बठिंडा की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमनीत कोंडल ने बुधवार को इसकी पुष्टि की, हालांकि उन्होंने मामले पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी करने से इनकार किया।

मामला एनआईए को सौंपा गया

जानकारी के अनुसार, पंजाब पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद यह मामला पिछले सप्ताह एनआईए को सौंपा गया। अब एजेंसी इसे मोहाली स्थित विशेष एनआईए अदालत में प्रस्तुत करेगी। एनआईए अब बठिंडा पुलिस द्वारा एकत्र किए गए सभी साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्टों और जांच निष्कर्षों का विश्लेषण करेगी।

10 सितंबर को हुए थे दो विस्फोट

यह हादसा 10 सितंबर 2025 को जीदा गांव में हुआ था, जिसमें आरोपी गुरप्रीत सिंह (19) और उसके पिता जगतार सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस को घटना की जानकारी एक निजी अस्पताल से मिली, जहां घायलों का इलाज चल रहा था। दूसरे विस्फोट में गुरप्रीत का दाहिना हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे बाद में काटना पड़ा।

कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था आरोपी

पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि कानून का छात्र गुरप्रीत कथित तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर इस्लामी कट्टरपंथी विचारधाराओं से प्रभावित था। उसने कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख अजहर मसूद जैसे आतंकियों से संबंधित ऑनलाइन हैंडल्स को फ़ॉलो करने के लिए एक फर्ज़ी सोशल मीडिया आईडी बनाई थी। सूत्रों के अनुसार वह बम बनाने से संबंधित वीडियो और रसायन मिश्रण के तरीकों का उत्साही अनुयायी था।

फिदायीन हमला करने की तैयारी

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में जम्मू-कश्मीर के कठुआ स्थित एक रक्षा प्रतिष्ठान पर आत्मघाती हमला करने की योजना कबूल की थी। हालांकि, बठिंडा पुलिस को किसी संगठित आतंकी नेटवर्क से उसके सीधे संबंधों के ठोस सबूत नहीं मिले। बावजूद इसके, उसके पास से विस्फोटक रसायनों की बरामदगी और हमले की कथित योजना ने मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बना दिया।

एनआईए जांच की नई दिशा

पुलिस सूत्रों ने बताया कि एनआईए अब इस मामले में गुरप्रीत की डिजिटल गतिविधियों, सोशल मीडिया इतिहास, और ऑनलाइन खरीदे गए रसायनों की सप्लाई चेन की जांच करेगी। जानकारी मिली है कि आरोपी ऑनलाइन प्लेटफार्मों से रसायन मंगवाता था और गांव के अलग-अलग स्थानों से कूरियर के जरिए पार्सल इकट्ठे करता था।

फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

एक अधिकारी ने बताया कि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि विस्फोट में किन रसायनों का इस्तेमाल हुआ, क्योंकि फोरेंसिक विशेषज्ञों ने अंतिम रिपोर्ट पुलिस को नहीं सौंपी थी। उन्होंने कहा, “विस्फोट इतने तीव्र थे कि पंजाब पुलिस और सेना की बम निरोधक टीमों को स्थल को सुरक्षित करने में करीब दस दिन लग गए। सफाई के दौरान जब घर को पानी से धोया गया तो रासायनिक पदार्थ पुनः विस्फोट करने लगे, जिसके चलते विशेषज्ञों को रोबोटिक उपकरणों की मदद से जांच करनी पड़ी।”

अब एनआईए करेगी अंतिम सच्चाई का खुलासा

करीब दो महीने तक चली जिला पुलिस जांच के बाद अब यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एनआईए के पास चला गया है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटेगी कि क्या यह मामला केवल आत्म-कट्टरपंथ का था या इसके पीछे किसी आतंकी संगठन की रिमोट-गाइडेड साजिश भी थी।

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