जालंधर में क्या सचमुच नहीं बिकते घटिया और मिलावटी खाद्य पदार्थ? 37 सैंपलों में से सिर्फ 2 फेल

Edited By Kalash,Updated: 12 Oct, 2026 02:26 PM

jalandhar health department

क्या जिले में सचमुच घटिया एवं मिलावटी खाद्य पदार्थ नहीं बिकते या फिर दाल में कुछ काला है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पिछले 2 महीनों में अलग-अलग खाद्य पदार्थों की 37 सैंपलों में से लेबोरेटरी जांच में सिर्फ 2 सैंपल ही फेल पाए गए हैं जबकि 35 पास...

जालंधर (रत्ता): क्या जिले में सचमुच घटिया एवं मिलावटी खाद्य पदार्थ नहीं बिकते या फिर दाल में कुछ काला है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक पिछले 2 महीनों में अलग-अलग खाद्य पदार्थों की 37 सैंपलों में से लेबोरेटरी जांच में सिर्फ 2 सैंपल ही फेल पाए गए हैं जबकि 35 पास हुए हैं। उल्लेखनीय है कि घटिया एवं मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की फूड सेफ्टी टीम वैसे तो रूटीन में खाद्य पदार्थों के सैंपल भरती है और त्यौहारों के दिनों में सैंपलिंग की यह प्रक्रिया तेज हो जाती है लेकिन फिर भी सैंपलिंग की यह प्रक्रिया शायद महज खाना पूर्ति के लिए की जाती है। मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर लोगों की चिंता इसलिए बढ़ती जा रही है क्योंकि दूध, पनीर, घी, मिठाइयों, मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका के चलते आम जनता की सेहत पर खतरा मंडराता रहता है। खाद्य पदार्थों में मिलावट न केवल लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह एक गंभीर अपराध भी है।

जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की फूड सेफ्टी विंग ने अगस्त और सितम्बर महीने के दौरान जिले में से कुल 114 सैंपल भरे जिनमें से उन्हें 44 की रिपोर्ट प्राप्त हुई। इन 44 में से पनीर के 7, टोमेटो सॉस एवं रेड चिली सॉस का एक-एक सैंपल फेल हुआ जबकि 35 पास हो गए। पनीर के फेल हुए 7 सैंपलों में से 5 अनसेफ फॉर ह्यूमन तथा 2 सब स्टैंडर्ड पाए गए। गौरतलब है कि शहर में जगह-जगह लगी खाद्य पदार्थों की रेहड़ियों और कई छोटे-मोटे दुकानदारों के पास न तो एफ.एस.एस.ए.आई लाइसैंस है और न ही वे रजिस्टर्ड हैं। अधिकांश रेहड़ियों पर जहां हाइजीनिक कंडीशन ठीक नहीं होती, वहीं दुकानदार पिसी हुई हल्दी, मिर्च इत्यादि खुली ही बेचते रहते हैं।

फूड सेफ्टी विंग में वर्षों से एक ही सीट पर जमे बैठे अधिकारी एवं कर्मचारी 

वैसे तो सरकारी विभागों में नौकरी करने वालों पर हर समय तबादले रूपी तलवार लटकती रहती है लेकिन लगता है कि फूड सेफ्टी विंग पर सरकार का यह नियम लागू नहीं होता। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि फूड सेफ्टी विंग में कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी पिछले कई वर्षों से जालंधर में ही तैनात हैं और अगर कभी किसी की ट्रांसफर हो भी जाती है तो वह दोबारा जालंधर ही अपनी ट्रांसफर करवा लेता है।

त्यौहारों के दिनों में एक बार सरकार ने इधर-उधर किए थे फूड सेफ्टी विंग के सभी अधिकारी 

अक्तूबर सन 2023 में पंजाब सरकार ने एक बार त्यौहारों के मद्देनजर राज्य के सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों एवं फूड सेफ्टी ऑफिसर को उनके तैनाती वाले जिले में से हटाकर दूसरे जिले में तैनात किया था ताकि पूरे पंजाब में ठीक तरह से सैंपलिंग हो सके। उस वक्त फूड सेफ्टी ऑफिसर्स ने न केवल धड़ाधड़ सैंपलिंग की थी बल्कि भारी मात्रा में घटिया एवं मिलावटी खाद्य पदार्थ भी पकड़े थे।

फूड सेफ्टी विंग के अधिकारी अपनी मर्जी से मीडिया को देते हैं सैंपल भरने की जानकारी 

राज्य सरकार ने वैसे तो स्वास्थ्य विभाग में मास मीडिया विंग भी बनाया हुआ है ताकि विभाग की हर गतिविधि की जानकारी मीडिया को दी जा सके। हैरानी की बात यह है फूड सेफ्टी विंग कभी कभार ही मास मीडिया विंग की सेवाएं लेता है, जबकि अधिकांश बार अधिकारी अपनी मर्जी से ही मीडिया को सैंपल भरने की जानकारी देते हैं। किसी दुकान से सैंपल भरने के बाद उसे सार्वजनिक न करने के पीछे क्या कारण हो सकता है, इसका अंदाजा हर कोई भली भांति लगा सकता है।

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