"मैं SIT के सामने पेश नहीं हुआ, SIT मेरे घर आई थी" — ज्ञानी रघबीर सिंह

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 13 Jun, 2026 10:50 PM

i did not appear before the sit the sit came to my home  giani raghbir singh

श्री दरबार साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी और श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों और दावों को लेकर अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी विशेष जांच दल (SIT) के कार्यालय में पेश होने...

अमृतसर: श्री दरबार साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी और श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों और दावों को लेकर अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी विशेष जांच दल (SIT) के कार्यालय में पेश होने नहीं गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIT के सदस्य पहले से समय लेकर उनके निवास पर आए थे और 2 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब में हुई कार्रवाई के संबंध में उनसे जानकारी ली गई।

ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में यह प्रचारित किया जा रहा है कि वह SIT के सामने पेश हुए हैं, जबकि यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने दोहराया कि जांच टीम उनके घर आई थी और बातचीत केवल 2 दिसंबर 2024 को श्री अकाल तख्त साहिब में हुई कार्रवाई तक ही सीमित रही।

उन्होंने बताया कि SIT की ओर से 328 पावन स्वरूपों के मामले या किसी अन्य संवेदनशील विषय को लेकर उनसे कोई सवाल नहीं पूछा गया। केवल उस दिन श्री अकाल तख्त साहिब में शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल और अन्य नेताओं से पूछे गए सवालों तथा उनके जवाबों के संबंध में जानकारी ली गई।

ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि 2 दिसंबर की पूरी कार्रवाई खुले तौर पर हुई थी, जिसे टीवी चैनलों, प्रिंट मीडिया और दुनिया भर की सिख संगत ने लाइव देखा और सुना था। इसलिए उस कार्रवाई को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं है।

उन्होंने इस दौरान ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा की जा रही टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह स्वयं भी 328 पावन स्वरूपों के मामले में SIT के सामने अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। ऐसे में उनके द्वारा की जा रही टिप्पणियां हैरान करने वाली हैं।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने धार्मिक पदों पर सेवा की है, उन्हें अपने विचार धर्म की मर्यादा और सिद्धांतों के अनुरूप ही रखने चाहिए। धर्म और राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है और इससे समाज को भी सही दिशा मिलती है। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा, "गुरु के दर पर जो भी कहा जाए, वह सत्य होना चाहिए। धर्म से प्रेरणा लेकर ही राजनीति की जानी चाहिए।"

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