संगतों के लिए श्रद्धा का केन्द्र बना गुरुद्वारा श्री बेर साहिब(तस्वीरें)

Edited By Vaneet,Updated: 05 Nov, 2019 05:57 PM

श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव पर देश-विदेश की संगतों के लिए ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री बेर साहिब विशेष श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है। ...

सुल्तानपुर लोधी(सोढ़ी): श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव पर देश-विदेश की संगतों के लिए ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री बेर साहिब विशेष श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है। सबसे अधिक संगतें गुरुद्वारा श्री बेर साहिब दर्शनों के लिए पहुंच रही है, जबकि गुरुद्वारा श्री संतघाट साहिब, गुरुद्वारा श्री हट साहिब, गुरुद्वारा श्री गुरु का बाग, पुरातन घर बेबे नानकी जी धर्मशाला, गुरुद्वारा श्री कोठड़ी साहिब के दर्शनों के लिए भी पैदल जा रही है। गुरुद्वारा श्री बेर साहिब जी व अन्य गुरुद्वारों को सुन्दर लाईटों के साथ सजाया गया है। नए दर्शनी स्थल का बाहरी दृश्य संगतों को मंत्र-मुग्ध कर रहा है।

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इसके अलावा गुरुद्वारा साहिब के अंदर खजूर व अन्य पुरातन पेड़ों को हरी लाईटों के साथ शिंगार कर बहुत खूबसूरत नजारा पेश किया गया है। आज भी लाखों की संख्या में देश-विदेश से संगतें सुल्तानपुर लोधी में पहुंची, जिन्होंने गुरुबाणी कीर्तन सुना और पावन सरोवर में स्नान किया। मंगलवार की सुबह श्री सचखंड श्री हरिमन्दर साहिब श्री अमृतसर के हजूरी रागी भाई सतनाम सिंह कोहाड़का की ओर से आसा दी वार के कीर्तन के साथ हुई। उपरांत दिन के दीवान में सचखंड श्री हरिमन्दर साहिब श्री अमृतसर के हजूरी रागी भाई संदीप सिंह और भाई तारबलबीर सिंह के रागी जत्थों ने श्री गुरु नानक देव जी की पावन बाणी का मनोहर व मधूर कीर्तन किया। गुरुद्वारा श्री फतहगढ़ साहिब के मुख्य ग्रंथी ग्यानी हरपाल सिंह और ग्यानी सरबजीत सिंह लुधियाना वालो ने गुरुशब्द विचार से संगत को निहाल किया। 

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भाई सुरजीत सिंह सभ्राय हैड ग्रंथी व भाई अजमेर सिंह एडिशनल हैड ग्रंथी, भाई हरजीत सिंह प्रचारक इंचार्ज माझा जोन ने भी उपस्थित भरी व संगतों को यह इतिहास सुनाया। गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में संत बाबा जगतार सिंह कार सेवा वालों की ओर से मुख्य लंगर में गुरु के लंगर लगाए गए। इस दौरान दिलचस्प बात यह रही कि 550वें प्रकाशोत्सव मना रही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का अपना एक भी लंगर सुल्तानपुर लोधी में नहीं लगा, जब कि संतों-महापुरुषों व जत्थेबंदियों की ओर से 68 लंगर लगाए गए।\

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