खाड़ी युद्ध ने इंडस्ट्री को हिलाया, तेल से लेकर सभी कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल

Edited By Kalash,Updated: 10 Mar, 2026 10:48 AM

gulf war shook to industry

इस बार कोलोन मेले में प्रतिभागियों और खरीदारों की संख्या भी पिछले वर्षों की तुलना में कम रही।

जालंधर (धवन): जर्मनी के कोलोन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में इस बार भारतीय हैंड टूल्स निर्यातकों को अपेक्षित रिस्पॉन्स नहीं मिला। एच.आर. इंटरनैशनल के चेयरमैन नरेश शर्मा ने कहा कि वर्तमान में चल रहे खाड़ी क्षेत्र के तनाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

शर्मा ने बताया कि इस बार कोलोन मेले में प्रतिभागियों और खरीदारों की संख्या भी पिछले वर्षों की तुलना में कम रही। उद्योग जगत को उम्मीद थी कि भारत और यूरोप के बीच हुए विभिन्न व्यापारिक समझौतों के बाद यूरोप से बड़ी संख्या में खरीदार मेले में पहुंचेंगे, लेकिन उम्मीद के विपरीत इस बार बहुत कम खरीदार आए, जिससे निर्यातकों को निराशा हाथ लगी।

उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा प्रभाव उद्योग पर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है, जिससे उद्योग के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। स्टील की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है और तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन तथा अन्य उत्पादन लागत भी बढ़ गई है।

नरेश शर्मा ने आगे बताया कि प्लास्टिक दाने की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके अलावा औद्योगिक गैसों के दामों में भी लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ौतरी दर्ज की गई है। बाजार में कई तेल आधारित उत्पादों की कमी भी देखने को मिल रही है, जिससे उद्योग की उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि उद्योग को राहत देने के लिए कच्चे माल की कीमतों पर नियंत्रण और निर्यातकों के लिए विशेष सहायता पैकेज पर विचार किया जाए, ताकि भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रख सके।

नरेश शर्मा ने यह भी कहा कि भारतीय हैंड टूल्स उद्योग लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में वैश्विक हालात सुधरेंगे और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग बढऩे से भारतीय निर्यातकों को फिर से बेहतर अवसर मिलेंगे।

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