Edited By Kalash,Updated: 23 Aug, 2026 10:36 AM

नगर निगम के यूनियन नेताओं और कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जालंधर शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है।
जालंधर (खुराना): नगर निगम के यूनियन नेताओं और कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जालंधर शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। पिछले चार-पांच दिनों से शहर में कूड़े की लिफ्टिंग नहीं होने के कारण जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई देने लगे हैं। सरकार समर्थक चंदन गरेवाल गुट और बंटू सबरवाल गुट से संबंधित यूनियन नेता व कर्मचारी हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण न तो सरकारी ड्राइवर कूड़ा उठा रहे हैं और न ही प्राइवेट ठेकेदारों को काम करने दिया जा रहा है। इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है।
एक ओर मेयर वनीत धीर शहर की ब्यूटीफिकेशन को लेकर कई काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सफाई व्यवस्था बिगड़ने से इन प्रयासों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। शनिवार को निगम कर्मचारियों ने पीएनबी चौक से लेकर भगवान वाल्मीकि चौक तक ओल्ड जीटी रोड के बीचों-बीच कूड़े के ढेर लगा दिए। इससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा और पूरे इलाके में गंदगी का माहौल बन गया। इस से बीमारी फैलने का भी डर बन रहा है।
हड़ताल के चलते प्लाजा चौक डंप भी दोबारा शुरू हो गया है और वहां कूड़े के ढेर लगने लगे हैं। शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था के कारण सरकार और निगम प्रशासन को भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन नेताओं की मुख्य मांगों में 607 करोड़ रुपए के सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट प्रोजैक्ट को निजी कंपनी को न देना तथा 1,196 सफाई कर्मचारियों की पक्की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करना शामिल है। हालांकि, दोनों मांगों को स्वीकार करना निगम प्रशासन के लिए आसान नजर नहीं आ रहा।
मंगलवार को पार्षद हाउस की बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट प्रोजैक्ट को लेकर चर्चा होनी है और इसे निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी बताई जा रही है। वहीं, 1,196 सफाई कर्मचारियों की पक्की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने में भी कई अड़चनें सामने आ रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूनियन की हड़ताल कितनी लंबी खिंचती है और इस दौरान शहर में कूड़े की समस्या कितनी गंभीर होती है। आने वाले दिनों में इस स्थिति का असर सरकार और नगर निगम प्रशासन पर किस रूप में पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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