मावां मांगदियां जवाब...“हमें मुफ्त योजनाएं नहीं, इंसाफ चाहिए” - नशे से उजड़े परिवारों ने सुनाया अपना दर्द

Edited By Kamini,Updated: 17 Sep, 2026 07:18 PM

families devastated by drug abuse narrated their pain

पंजाब के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए सरकार से मुफ्त सुविधाओं के बजाय नशे के खिलाफ ठोस कार्रवाई और अपने परिवार के सदस्यों की मौत के मामलों में इंसाफ की मांग की।

पंजाब डेस्क : “मुझे मुफ्त आटा-दाल, मुफ्त यात्रा या मुफ्त बिजली नहीं चाहिए। हम मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार पालते थे। हमें मुफ्त योजनाएं नहीं चाहिएं, हमें ‘चिट्टा’ (हेरोइन) से छुटकारा चाहिए।” ये शब्द अबोहर के उस युवक की मां के हैं, जिसने नशे के कारण अपनी जान गंवाई। वह पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 50 परिवारों में शामिल थीं, जिन्हें पंजाब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ द्वारा चंडीगढ़ में “मावां मांगदियां जवाब” (मांएं जवाब मांगती हैं) के बैनर तले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने पेश किया गया। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए सरकार से मुफ्त सुविधाओं के बजाय नशे के खिलाफ ठोस कार्रवाई और अपने परिवार के सदस्यों की मौत के मामलों में इंसाफ की मांग की।

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मुख्यमंत्री मान को इस्तीफा देना चाहिए — ढिल्लों

पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने नशे के कारण प्रभावित हुए परिवारों को मीडिया के सामने पेश करते हुए कहा कि पंजाब में नशे की वजह से मारे गए निर्दोष लोगों की संख्या 1984 में मारे गए निर्दोष लोगों से कई गुना अधिक है। केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने पंजाब के लोगों से इस सरकार को तुरंत सत्ता से हटाने की अपील की और मुख्यमंत्री से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की।

ढिल्लों ने कहा कि इन परिवारों का दर्द पंजाब के घर-घर की कहानी है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस दर्द को साझा करेगी और इस मुद्दे पर जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की शुरुआत 18 सितंबर से शुरू होने वाली 4 “नशा मुक्त पंजाब यात्राओं” से होगी। उन्होंने कहा कि यदि पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो 2 साल के भीतर नशे को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की 22 राज्यों में सरकार है और दावा किया कि पार्टी ने नक्सलवाद, उत्तर प्रदेश में गैंगस्टरवाद तथा कश्मीर में हिंसा को खत्म करके अपना ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने कहा, “इसी आधार पर हम पंजाब के लोगों से वादा करते हैं कि हम पंजाब से नशे को खत्म कर देंगे।”

मुख्यमंत्री गैंगस्टरों को गले लगा रहे हैं — जाखड़

भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि नशे से प्रभावित परिवारों के दुख को साझा करना जरूरी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नशे के कारण जान गंवाने वालों के प्रतीक के रूप में रखी गई खाली कुर्सियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इन परिवारों के दर्द को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि माताओं और बेटियों के दुख को साझा करने से ही उनका दर्द कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि “किसी और मां का बेटा न जाए।”

पंजाब सरकार की “युद्ध नशे के विरुद्ध” मुहिम पर तंज कसते हुए जाखड़ ने कहा कि यह अभियान मार्च 2025 में शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि अभियान शुरू होने के तीन महीने बाद पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने दावा किया था कि 8,344 एफआईआर दर्ज की गईं और 13,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। जाखड़ के अनुसार, अब सितंबर 2026 में डीजीपी दावा कर रहे हैं कि 79,000 गिरफ्तारियां की गई हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि डीजीपी के आंकड़े सही हैं तो इन लोगों के साथ जो कुछ हुआ है, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। जाखड़ ने डीजीपी के मई 2025 के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जहां से नशा बरामद होगा, वहां संबंधित पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। जाखड़ ने डीजीपी से पूछा कि अब तक कितने पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेलें नशा तस्करों के लिए सुरक्षित स्थान बन गई हैं। जाखड़ ने आगे आरोप लगाया कि पंजाब के मुख्यमंत्री गैंगस्टरों को गले लगा रहे हैं और उन्हें पार्टी में शामिल कर रहे हैं।

(गुलजार और मोहनजीत से जुड़ी घटनाओं के बाद पैदा हुए हालात को देखते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे परिवारों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई।)

“पुलिस ने कहा—नशा खरीदो, हम पकड़ लेंगे”

अबोहर से पहुंची एक महिला ने अपने भाई के साथ हुई घटना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें पता था कि उनका भाई नशा करता था। उन्होंने पुलिस के 100 नंबर पर फोन किया और नशे की बिक्री के संबंध में भी जानकारी दी। इसके बाद उन्हें हेल्पलाइन पर बात करने के लिए कहा गया। महिला के अनुसार, पुलिस ने उनसे कहा, “आप नशा खरीदो, हम मौके पर पहुंचकर उन्हें पकड़ लेंगे।” उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते वह खुद नशा खरीदने कैसे जा सकती थीं। उन्होंने सवाल किया कि जब उन्होंने पुलिस को पहले ही यह जानकारी दे दी थी कि नशा कहां बेचा जा रहा है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

मां ने अपने बेटे की मौत का जिक्र करते हुए कहा:

  • “वह मेरा इकलौता बेटा था। उसे मारकर फेंक दिया गया। पुलिस वाले कहते थे कि वे चार घंटे तक शव नहीं उठा सकते, क्योंकि उनके पास गाड़ी नहीं है।”
  • एक अन्य महिला ने बताया कि नशे की गिरफ्त में आने के बाद उसके दोनों बेटों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि अब वह घरों में झाड़ू-पोछा करके अपना गुजारा कर रही हैं। उनकी कहानी नशे से प्रभावित हजारों परिवारों के दर्द की झलक पेश करती है।
  • मोरिंडा से पहुंचे एक व्यक्ति ने बताया कि उनका बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। परिवार को यह भी पता नहीं चल सका कि उनका बेटा कब नशे की दलदल में फंस गया। उन्होंने सरकार से नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को बचाने के लिए मदद की मांग की।
  • खरड़ के घड़ूआं से पहुंचे एक युवक ने भी कहा कि वह खुद नशा करता है और सरकार से उसकी मदद करने की अपील की।
  • वहीं, नवांशहर से आए एक युवक ने कहा कि वे पुलिस को नशा तस्करों के बारे में जानकारी देते हैं, लेकिन पुलिस उनसे कथित तौर पर कहती है: “हमारे सामने नशा खरीदो, फिर हम उन्हें पकड़ेंगे।”

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