चीन के सस्ते फ्री-व्हील ने तोड़ी कमर, लुधियाना में दर्जनभर फैक्ट्रियों को लगे ताले!

Edited By Urmila,Updated: 05 Jan, 2026 11:09 AM

factories in ludhiana have been shut down

पिछले डेढ़ साल में साइकिलों के फ्री-व्हील बनाने वाली एक दर्जन से ज्यादा कंपनियों को ताले लग गए हैं।

लुधियाना (धीमान): पिछले डेढ़ साल में साइकिलों के फ्री-व्हील बनाने वाली एक दर्जन से ज्यादा कंपनियों को ताले लग गए हैं। इसकी मुखय वजह चीन से सस्ती दरों में आने वाले फ्री-व्हील और घरेलू साइकिल निर्माता कंपनियों को लागत पर ही माल सप्लाई करना माना जा रहा है। इससे परेशान होकर कुछ कारोबारियों ने तो उत्पादन बंद कर दिया है और कुछ ने दूसरा बिजनैस करना शुरू कर दिया। यह भी पता चला है कि रिप्लेसमैंट बाजार में भी साइकिल पार्ट्स नहीं लग पा रहे, क्योंकि अब साइकिल भी यूज एंड थ्रो वाली क्वालिटी के बनने शुरू हो गए हैं। इस बारे में यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन चरणजीत सिंह विश्वकर्मा व मौजूदा जनरल सैक्रेटरी वरुण कपूर कहते हैं कि कंपनियां बंद होने का मुख्य कारण चीन से सस्ते फ्री-व्हील का आना माना जा रहा है।

घरेलू कंपनियों की उत्पादन लागत से भी सस्ता मिल रहा चाइनीज फ्री-व्हील

जिस कीमत पर चीनी फ्री-व्हील वहां से आकर भारतीय बाजार में बिक रहा है, उस पर घरेलू कंपनियां तैयार भी नहीं कर पा रही। इसके अलावा साइकिल बनाने वाली कंपनियों ने भी कम्पीटिशन के चलते साइकिलों की ऐसी क्वालिटी कर दी है जिससे वह अब यूज एंड थ्रो वाली सूची में शामिल हो रहे हैं। बच्चों और टीनएजर्स के साइकिल तो इसी सूची के मुताबिक बाजार में बिक रहे हैं जिससे पार्ट्स रिप्लेसमैंट मार्कीट से फ्री-व्हील गायब होता जा रहा है। अगर दुकानदार को किसी साइकिल का फ्री-व्हील बेचना भी पड़ रहा है तो वह चीन का बेचता है जिससे उसे अच्छा-खासा मार्जिन मिल जाता है।

पार्ट्स रिप्लेसमैंट और रिपेयर न होने से तीन-चौथाई साइकिलों की दुकानें भी हुईं बंद

साइकिल बाजार की बात की जाए तो साइकिल बेचने वाली दुकानें भी बंद होनी शुरू हो गई हैं। ये दुकानें पार्ट्स रिप्लेसमैंट और रिपेयर के दम पर चलती थीं। साइकिल में तो मार्जिन नाममात्र ही मिलता था, इसीलिए दिल्ली में जो सबसे बड़ी लाजपत राय मार्कीट मानी जाती थी। उसमें करीब 120 दुकानें थी जो अब मात्र 30 रह गई है। इसी तरह जबलपुर भी साइकिल मार्कीट के लिए मशहूर था वहां भी अब 90 में से मात्र 25 दुकानें ही साइकिल का काम कर रही हैं।

नई पीढ़ी नहीं करना चाहती साइकिल का कारोबार

भारतीय साइकिल बनाने वाली कंपनियां भी फैंसी साइकिल बनाने की जगह टैंडरों में अधिक ध्यान दे रही है जिसके चलते चीन और ताइवान का साइकिल भारत में आ रहा है और वह भी यूज एंड थ्रो वाली सूची का ही हिस्सा है। दुकानें बंद होने का मुख्य कारण साइकिलों में मार्जिन कम होना भी प्रमुख है। नई पीढ़ी ने तो इस कारोबार में आने से मना कर दिया है। लुधियाना में करीब 30 कंपनियां हैं जो फ्री-व्हील बनाती हैं। उनमें से आधी कंपनियां बंद हो चुकी है और आधी बंद होने की कगार पर है। केंद्र सरकार को साइकिल इंडस्ट्री को बचाने के लिए विशेष पैकेज देना चाहिए।

जी.एस.टी. रिफंड बची हुई इंडस्ट्री को भी कर देगा बर्बाद

इस वक्त साइकिल पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को सबसे ज्यादा झटका जी.एस.टी. रिफंड न मिलने का लग रहा है। हर माह कारोबारियों का लाखों रुपया सरकारी खजाने में जमा हो रहा है। यह सारा पैसा कारोबारियों की कमाई का है और पिछले 2 महीने से कारोबारियों की कमाई सरकार के पास इकट्ठी होती जा रही है। यह खेल ज्यादा देर नहीं चलने वाला, इसलिए अगर सरकार ने रिफंड नही दिया तो फ्री-व्हील की तरह बाकी पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को भी ताले लगने से कोई नहीं बचा सकता।

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