जालंधर में रेस्टोरेंट-ढाबों वालों की डिजिटल चालबाजी हुई बेनकाब, करोड़ों की गड़बड़ी ने उड़ाए होश

Edited By Urmila,Updated: 03 Apr, 2026 02:25 PM

digital tax evasion racket exposed in jalandhar

जालंधर में टैक्स चोरी से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि राज्य भर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और रिसॉर्ट से जुड़े 239 खातों में लगभग 50 करोड़ रुपये की टैक्स गड़बड़ी की गई।

जालंधर : जालंधर में टैक्स चोरी से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि राज्य भर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और रिसॉर्ट से जुड़े 239 खातों में लगभग 50 करोड़ रुपये की टैक्स गड़बड़ी की गई। इनमें से 50 से अधिक खाते जालंधर से जुड़े पाए गए हैं। टैक्स चोरी के मामलों में मोहाली सबसे आगे है, जबकि जालंधर 6.72 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर दर्ज किया गया है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, ग्राहक जब रेस्टोरेंट में भोजन करता है तो उससे पूरा बिल वसूला जाता है, लेकिन टैक्स की राशि सरकारी खजाने तक नहीं पहुंचती। कई मामलों में बिलिंग सिस्टम से बिक्री की एंट्री हटाकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया जाता है। डिजिटल पेमेंट के लिए कारोबारी व्यापारिक खाते की बजाय निजी सेविंग अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे लेन-देन टैक्स सिस्टम से बाहर रह जाए।

चार तरीकों से उड़ाई जा रही टैक्स की रकम

• ट्रेनिंग मोड का खेल

बिलिंग मशीन को ट्रेनिंग मोड में डालकर ऐसे बिल निकाले जाते हैं जो सिस्टम में कभी दर्ज ही नहीं होते।

• एडमिन पासवर्ड से बिल गायब

नकद भुगतान के बाद बिल को मशीन से कैंसिल कर दिया जाता है, जिससे वह बिक्री रिपोर्ट में शामिल नहीं होता।

• डे-एंड रिपोर्ट में कटौती

दिन खत्म होने पर निकाली गई रिपोर्ट में सिर्फ वही बिल दिखते हैं जो जानबूझकर छोड़े जाते हैं, बाकी रकम निजी जेब में चली जाती है।

• दो अलग अकाउंट सिस्टम

कुछ संस्थान एक जीएसटी रिकॉर्ड और दूसरा कैश लेन-देन का गुप्त रिकॉर्ड चला रहे हैं, जिससे असली टर्नओवर छिपा रहता है।

डेटा एनालिटिक्स से खुला राज

राज्य जीएसटी विभाग की टैक्स इंटेलिजेंस यूनिट ने डिजिटल ट्रांजेक्शन, यूपीआई डेटा और बिक्री पैटर्न के विश्लेषण से इस घोटाले की परतें खोलीं। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन पेमेंट और घोषित टर्नओवर के बीच बड़ा अंतर नजर आने के बाद यह मामला पकड़ा गया।

जिलावार टैक्स चोरी के आंकड़े (प्रारंभिक जांच)

मोहाली – 8.16 करोड़ रुपये, जालंधर – 6.72 करोड़ रुपये, लुधियाना – 5.48 करोड़ रुपये, पटियाला – 3.83 करोड़ रुपये, अमृतसर – करीब 1 लाख रुपये, 

ऐसे रोकी जा सकती है यह चोरी

सभी बिलिंग मशीनों को रियल-टाइम ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जाए
बिलिंग सॉफ्टवेयर में डिलीट डेटा ट्रैकिंग अनिवार्य हो
केवल सरकारी मान्यता प्राप्त अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के उपयोग की अनुमति दी जाए

जांच एजेंसियों का अनुमान है कि यह घोटाला आने वाले समय में कई सौ करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। फिलहाल सैकड़ों संस्थानों की जांच जारी है और वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे बिल लेना न भूलें और संदिग्ध मामलों की जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाएं।

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