नेपाल की तबाही लुधियाना के लिए चेतावनी: सतलुज उफना तो बुड्ढा नाला बन सकता है बड़ी चुनौती

Edited By Urmila,Updated: 28 Aug, 2026 12:53 PM

devastation in nepal a warning for ludhiana

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और उससे सामने आ रही तबाही की तस्वीरों ने हजारों किलोमीटर दूर लुधियाना में भी एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।

लुधियाना (धीमान) : नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और उससे सामने आ रही तबाही की तस्वीरों ने हजारों किलोमीटर दूर लुधियाना में भी एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। अगर 1988 जैसी परिस्थितियां दोबारा बनीं और सतलुज खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया तो बुड्ढा नाले के आसपास तेजी से विकसित हुई रिहायशी आबादी का क्या होगा? लोग बेशक बिना सोचे समझे बुड्डे नाले के आसपास नई बन रही आबादी में कदम रख रहे है। लेकिन अगर सतलुज के जरिये बाढ़ बुड्डे नाले में आ गई तो यहां नेपाल से भी ज्यादा तबाही होगी।

कालोनाइजरों ने बिना सोचे समझे ही साउथर्न बाई-पास पर लगजरी कालोनियां बुड्डे नाले के बिल्कुल साथ इन्हें डिवेलेप कर दिया है। यहां रहने वालों को जहां हमेशा बाढ़ का खतरा सताएगा वहीं वह गंदी बदबू और जमीन का जहरीला पानी भी पीना को मजबूर होना पड़ेगा।

हालांकि नेपाल में ग्लेशियर के टूटने के बाद आई अचानक बाढ़ ने बस्तियों, सड़कों और पुलों को तबाह कर दिया है तथा बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और लोग लापता हैं। यह घटना लुधियाना जैसी परिस्थितियों से सीधे तौर पर समान नहीं है, लेकिन इसने एक बार फिर यह जरूर साबित किया है कि पानी जब अपने प्राकृतिक रास्ते और क्षमता से बाहर निकलता है तो आधुनिक निर्माण भी कुछ ही समय में असहाय दिखाई देने लगते हैं।

यहां बता दे कि वर्ष 2019 में सतलुज का जलस्तर बढ़ने के बाद बुड्ढा नाले में रिवर्स फलो की स्थिति बनी थी। उस दौरान नाले का प्रदूषित पानी कई रिहायशी इलाकों में घुस गया था और कहीं-कहीं घरों तथा गलियों में दो से तीन फीट तक गंदा पानी भरने की स्थिति सामने आई थी।

अभी तक ग्राहक किसी प्रोजेक्ट में प्लॉट या मकान खरीदते समय सीएलयू, अप्रूवल, सड़क, सीवरेज, बिजली, पार्क और कीमत देखते रहे हैं। लेकिन नेपाल जैसी घटनाओं और पंजाब के अपने पुराने बाढ़ रिकॉर्ड के बाद अब एक और सवाल जुड़ना चाहिए जिस जमीन पर करोड़ों रुपये के मकान और प्लॉट बेचे जा रहे हैं, उसका वास्तविक फलड रिस्क क्या है?

प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन नए प्रोजेक्टों में जमीन का स्तर क्या है, प्राकृतिक ड्रेनेज चैनल कहा है और 25 , 50 व 100 वर्ष की बाढ़ की स्थिति में पानी किस स्तर तक पहुंच सकता है और आपात स्थिति में पानी निकालने का रास्ता क्या होगा। यह सवाल कॉलोनाइजरों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि ग्राहकों के मन में यह आशंका बैठ गई कि किसी विशेष क्षेत्र में बाढ़ का जोखिम है तो इसका सीधा असर वहां की प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों पर भी पड़ सकता है। 

वर्ष 1988 की विनाशकारी बाढ़ का जिक्र आज भी पंजाब में होता है। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उस समय भारी वर्षा और सतलुज में पानी की स्थिति के कारण व्यापक क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आया था। रिकॉर्ड में बुड्ढा नाले के किनारे बसे करीब 100 गांवों तक के प्रभावित होने का उल्लेख मिलता है। नेपाल की तस्वीरों को सिर्फ देखकर भूलना नहीं, उनसे सीखना होगा नेपाल और लुधियाना की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि नेपाल जैसी तबाही लुधियाना में निश्चित रूप से होगी। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं का सबसे बड़ा सबक यही है कि तैयारी तब नहीं की जाती जब पानी घरों में घुस चुका हो।

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