स्वच्छ भारत मिशन की पूरी ग्रांट ही खर्च नहीं पाया निगम, लाखों रुपए भेजे वापस

Edited By Kalash,Updated: 06 Jun, 2022 11:02 AM

corporation could not spend the grant of swachh bharat mission

पंजाब सरकार ने नगर निगमों को चलाने के लिए लोकल बॉडीज विभाग बना रखा है और निगमों में भी आई.ए.एस

जालंधर (खुराना): पंजाब सरकार ने नगर निगमों को चलाने के लिए लोकल बॉडीज विभाग बना रखा है और निगमों में भी आई.ए.एस., पी.सी.एस. लेवल के अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। इसके अलावा एस.ई., एक्सियन, एस.डी.ओ. तथा जे.ई. लैवल के दर्जनों अधिकारी जालंधर निगम नगर निगम में तैनात रहते हैं पर इतना सब होने के बावजूद यदि यह बात सामने आए कि बड़े-बड़े अधिकारियों में विजन की कमी है तो सरकारी सिस्टम वाकई में चिंता का विषय है।

आज से करीब 5 साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में स्वच्छ भारत मिशन लागू किया था तब उन्होंने साफ सफाई व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान देने के अलावा इस मिशन के लिए अरबों रुपए के फंड की भी व्यवस्था की थी। तब यह तय हुआ था कि शहरी क्षेत्रों को उनकी जनसंख्या के हिसाब से स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रांट दी जाएगी। उस समय जालंधर निगम को भी प्रति व्यक्ति के हिसाब से ग्रांट आई थी जो 20 करोड़ रूपए से भी ज्यादा की थी।

खास बात यह है कि जालंधर निगम के अधिकारी उस ग्रांट को पूरी तरह खत्म ही नहीं कर पाए और पिछले दिनों ही करीब 75 लाख रुपए से ज्यादा पैसे वापस सरकार को भेजने पड़े हैं। यह पैसे जालंधर निगम के अधिकारी आसानी से खर्च कर सकते थे और इन पैसों को खर्च करने के बाद सरकार से अतिरिक्त पैसे तक मंगवाए जा सकते थे परंतु ऐसा हुआ नहीं जिस कारण इस घटना को शहर का एक बड़ा नुक्सान माना जा रहा है।

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जिस ग्रांट का इस्तेमाल नहीं हो पाया

मशीनरी फंड :

- फंड आए : 4 करोड़ 60 लाख
- खर्च हुए : 4 करोड़ 5 लाख 54 हजार
- वापस किए : 54 लाख 46 हजार

पिट्स एंड शैड फंड :

- फंड आए : 2 करोड़ 16 लाख 22 हजार
- खर्च हुए : 2 करोड़ 15 लाख 71 हजार 480
- वापस भेजे : 50 हजार 520

ट्राई साइकिल :

- फंड आए : 50 लाख
- खर्च किए : 32 लाख 61 हजार 600
- फंड वापस भेजे : 17 लाख 38 हजार 400

ऑर्गेनिक वेस्ट कंपोस्ट :

- फंड आए : 4 लाख 50 हजार
- खर्च किए : निल
- वापस भेजे : 4 लाख 50 हजार

70 लाख की मशीनरी और खरीद सकता था निगम
केंद्र सरकार की ओर से आए फंड को यदि निगम पूरी तरह खर्च करता तो निगम करीब 70 लाख रुपए से ज्यादा की राशि से कूड़ा ढोने वाली मशीनरी और रेहडे इत्यादि खरीद सकता था परंतु अधिकारियों की लापरवाही के चलते ऐसा नहीं हो सका।

निगम अधिकारियों के पास यदि विजन होता तो इस 70 लाख रुपए से छोटे टिप्पर खरीद कर पूरे शहर को सुविधा प्रदान की जा सकती थी परंतु निगम अधिकारियों ने इस मामले में घोर नालायकी बरती।

जागरूकता पर ही खर्च कर दिए पूरे 53 लाख
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जालंधर को आई.ई.सी. गतिविधियों के लिए 53 लाख रुपए की ग्रांट मिली थी जिसके तहत लोगों को गीले सूखे कूड़े तथा साफ-सफाई प्रति जागरूक किया जाना था। हैरानी की बात यह है कि निगम ने इस ग्रांट का एक-एक पैसा खर्च कर लिया हालांकि यह ग्रांट नुक्कड़ नाटकों और सैमीनारों में ही खर्च हो गई जिसका शहर को कोई लाभ नहीं हुआ और आज भी शहर के लोग गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग नहीं कर रहे।

इन 53 लाख को खर्च करने के लिए जालंधर निगम ने जो विशेष टीम रखी हुई थी उसने इन कार्यकाल दौरान खानापूर्ति हेतु कई आयोजन किए और उन आयोजनों पर लाखों रुपए फिजूल ही खर्च कर दिए गए। यदि स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिली इस 53 लाख रुपए की ग्रांट के खर्च की जांच करवाई जाए तो जालंधर निगम में ही एक बड़ा घपला सामने आ सकता है।

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