Edited By Kamini,Updated: 17 Oct, 2026 12:02 PM

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर दिए बयान पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पंजाब डेस्क: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर दिए बयान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सेशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके शिरोमणि अकाली दल के परिषद सदस्य दिलबाग सिंह विर्क ने सवाल खड़े करते हुए सीएम मान से माफी मांगने के लिए कहा है।
दरअसल, शहीद-ए-आजम भगत सिंह को फांसी दिए जाने और उनके अंतिम संस्कार से जुड़े मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दिलबाग सिंह विर्क ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर फिल्लौर में मुख्यमंत्री के दिए गए बयान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भगत सिंह की शहादत और उनके अंतिम संस्कार से जुड़े इतिहास को गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने अपने वीडियो में कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह के इतिहास के बारे में बयान देते समय तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए। भगत सिंह की शहादत जैसे संवेदनशील विषय पर गलत जानकारी देना उचित नहीं है।
CM मान के बयान पर उठाए सवाल
अकाली दल के नेता के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में कहा था कि ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह को सजा सुनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने इस घटना को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। सीएम ने कहना है कि, ब्रिटिश फौज ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी देने के बाद उनके पिता किशन सिंह बुलाया कहा कि, अपने शव को पहचान कर ले जाओ। इस दौरान पिता किशन सिंह ने कहा कि, तीनों ही मेरे बेटे हैं।
इतिहास का सच
दिलबाग सिंह ने कहा कि, इतिहास के अनुसार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी देने की तारीख 24 मार्च 1931 तय थी, लेकिन उन्हें 23 मार्च को ही फांसी दे दी गई। इस दौरान सजा ब्रिटिश फौज ने नहीं बल्कि ब्रिटिश सरकार ने दी थी। वहीं फांसी देने के बाद ब्रिटिस सरकार बहुत घबरा गई थी। लोगों के विरोध की आशंका के चलते तीनों क्रांतिकारियों के शवों को गुप्त रूप से जेल की पिछली दीवार से बाहर निकाला और फिरोजपुर के पास सतलुज नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया और अंतिम संस्कार के बाद अवशेषों को नदी में बहाने की कोशिश की गई, ताकि लोगों को घटना की जानकारी न मिल सके। आज हुसैनीवाला में तीनों शहीदों का स्मारक बना हुआ है।
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