भूख हड़ताल पर बैठे कांग्रेस विधायक, पुलिस प्रशासन को दिया अल्टीमेटम

Edited By Sunita sarangal,Updated: 06 May, 2026 02:30 PM

congress mla on hunger strike

राजनीति में आए दिन धरने लगते हैं, नारे गूंजते हैं और मांगें मानने के दावे होते हैं।

बरनाला(विवेक सिंधवानी, रवि) : राजनीति में आए दिन धरने लगते हैं, नारे गूंजते हैं और मांगें मानने के दावे होते हैं। लेकिन जब कोई विधायक अपनी कुर्सी छोड़कर जमीन पर बैठ जाए और भूख हड़ताल का रास्ता अपना ले, तो संदेश साफ होता है कि मामला गंभीर है। बरनाला में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

हल्का बरनाला से कांग्रेसी विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों अपने साथी नेताओं के साथ जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनकी एक ही मांग थी - बरनाला पुलिस द्वारा कांग्रेसी नेताओं पर दर्ज किया गया मुकदमा तुरंत रद्द किया जाए।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 14 मार्च 2026 का है, जब जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कचहरी चौक पर धरना दिया गया था। धरना महिलाओं को सरकार द्वारा दी जाने वाली 48,000 रुपये की बकाया राशि के मुद्दे पर था। कांग्रेसी नेताओं का आरोप था कि आम महिलाओं को उनका हक नहीं मिल रहा है। उस धरने के दौरान थाना सिटी-2 पुलिस ने कांग्रेसी नेताओं पर सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने सहित कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया था, जिसे कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

अल्टीमेटम से भूख हड़ताल तक

विधायक काला ढिल्लों ने पहले पुलिस को अल्टीमेटम दिया था कि मुकदमा रद्द किया जाए, अन्यथा बड़ा संघर्ष शुरू किया जाएगा। पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई न होने पर विधायक ने अपना वादा निभाया और भूख हड़ताल पर बैठ गए। विधायक के साथ मनविंदर कौर पक्खो, मलकीत कौर सहोता, भूपिंदर झलूर, जसप्रीत कौर, कमलजीत चक्क, कुलविंदर सिंह, गुरमेल सिंह मौड़, बलवंत शर्मा हमीदी और यूथ नेता सुखजिंदर सिंह भी डटे रहे।

महिलाओं की राशि का मुद्दा - असली चिंगारी

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ वे 48,000 रुपये हैं जो महिलाओं को मिलने थे लेकिन अभी तक नहीं मिले। पूर्व जिला अध्यक्ष मक्खन शर्मा ने कहा कि जो पार्टी महिलाओं के हक की बात करती थी, वही सरकार बनने के बाद उनके हक दबा रही है।

भूख हड़ताल वाली जगह पर कांग्रेसी नेताओं की भारी भीड़ उमड़ी। ब्लॉक कांग्रेस बरनाला के अध्यक्ष महेश लोटा, बीबी सुरिंदर कौर बालियां, ब्लॉक महल कलां के अध्यक्ष परमिंदर सिंह शम्मी ठुल्लीवाल, वरिष्ठ नेता नरेंद्र शर्मा, जसमेल सिंह डेयरीवाला, वरुण बत्ता, जसविंदर टिल्लू, बलदेव भुच्चर, पूर्व नगर पार्षद मोहन लाल, यूथ हल्का अध्यक्ष लक्की कंडा और सतनाम सिंह पक्खी सेखवां सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।

क्या है राजनीतिक संदेश?

यह भूख हड़ताल सिर्फ एक मुकदमे का मामला नहीं है, इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है। विपक्ष के रूप में कांग्रेस यह दिखाना चाहती है कि वह सड़कों पर लड़ने से नहीं डरती। वहीं सत्ताधारी दल के लिए यह एक परीक्षा है कि वह इस दबाव से कैसे निपटता है। यह स्पष्ट घोषणा की गई है कि जब तक मुकदमा रद्द नहीं होता, भूख हड़ताल जारी रहेगी। अब बरनाला की राजनीतिक फिजा में अगली चाल सरकार की होगी।

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