Edited By Vatika,Updated: 16 Jul, 2026 09:48 AM

आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नवजात की मौत प्रसव से पहले ही गर्भ में हो चुकी थी।
बठिंडा (विजय वर्मा): बठिंडा के सिविल अस्पताल स्थित माता एवं शिशु केंद्र में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के बाद बुधवार सुबह हंगामा हो गया। गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं अस्पताल प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नवजात की मौत प्रसव से पहले ही गर्भ में हो चुकी थी।
गलत तरीके से चीरा लगाने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव
कोटकपूरा निवासी राजिंदर कौर को देर रात प्रसव पीड़ा होने पर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के समय कोई वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ मौके पर मौजूद नहीं था और पूरा मामला नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चलाया गया। उनका कहना है कि प्रसव के दौरान महिला के पेट पर अत्यधिक दबाव डाला गया और गलत तरीके से चीरा लगाने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिससे महिला की हालत भी गंभीर हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने जवाब मांगा तो संबंधित स्टाफ मौके से चला गया।
जांच के दौरान बच्चे की धड़कन पहले ही बंद पाई गई
वहीं सिविल अस्पताल के एसएमओ एवं महिला एवं बाल अस्पताल के प्रभारी डॉ. प्रीत महिंदर ने बताया कि महिला को रात करीब 12 बजे भर्ती किया गया था और सुबह 6:30 बजे प्रसव हुआ। उनके अनुसार जांच के दौरान बच्चे की धड़कन पहले ही बंद पाई गई थी और उसकी गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि पहली सामान्य डिलीवरी के दौरान एपिज़ियोटॉमी (चीरा) लगाना एक सामान्य चिकित्सीय प्रक्रिया है। बच्चे का आकार बड़ा होने के कारण ऊतकों के फटने की स्थिति बनी थी, जिसका तुरंत उपचार किया गया तथा महिला को बेहतर इलाज के लिए एम्स बठिंडा रेफर कर दिया गया। सूचना मिलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अभी तक परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। शिकायत मिलने पर तथ्यों के आधार पर जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।