पढ़ें, मौत को 'दुल्हन' बनाने वाले भगत सिंह के जीवन से जुड़े कुछ अनसुने किस्से

Edited By Vatika,Updated: 28 Sep, 2018 10:58 AM

bhagat singh freedom fighter on his 111th birth anniversary

आज भारत के वीर सपूत क्रांतिकारी भगत सिंह की 111वीं जयंती है। शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को लायलपुर जिला (फैसलाबाद, पाकिस्तान) के बंगा गांव में हुआ। हालांकि, उनके जन्‍म की तारीख पर कुछ विरोधाभास है, लेकिन उनका परिवार 28 सितंबर को ही...

जालंधर (वेब डेस्क): आज भारत के वीर सपूत क्रांतिकारी भगत सिंह की 111वीं जयंती है। शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को लायलपुर जिला (फैसलाबाद, पाकिस्तान) के बंगा गांव में हुआ। हालांकि, उनके जन्‍म की तारीख पर कुछ विरोधाभास है, लेकिन उनका परिवार 28 सितंबर को ही जन्मदिवस मनाता है। वहीं, कुछ जगहों पर 27 सितंबर को उनके जन्‍मदिन का जिक्र मिलता है।

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भगत सिंह के पूर्वजों का जन्म पंजाब के नवांशहर के समीप खटकड़कलां गांव में हुआ था। इसलिए खटकड़कलां इनका पैतृक गांव है। भगत सिंह के दादा सरदार अर्जुन सिंह पहले सिख थे जो आर्य समाजी बने। इनके तीनों सुपुत्र किशन सिंह, अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे। 13 अप्रैल, 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्‍याकांड ने भगत सिंह पर गहरा असर डाला और वे भारत की आजादी के सपने देखने लगे। जानकर हैरानी होगी कि परिजनों ने जब भगत सिंह की शादी करनी चाही तो वह घर छोड़कर कानपुर भाग गए। 

PunjabKesari, bhagat singh ,bhagat singh birthdayअपने पीछे वे जो खत छोड़ गए, उसमें उन्‍होंने लिखा कि उन्‍होंने अपना जीवन देश को आजाद कराने के महान काम के लिए समर्पित कर दिया है। इसलिए कोई दुनियावी इच्‍छा या ऐशो-आराम उनको अब आकर्षित नहीं कर सकता। ऐसे में, शहीद-ए-आजम की शादी हुई, पर कैसे हुई, इसके बारे में बताते हुए भगत सिंह की शहादत के बाद उनके घनिष्ठ मित्र भगवती चरण वोहरा की धर्मपत्नी दुर्गा भाभी ने, जो स्वयं एक क्रांतिकारी वीरांगना थीं, कहा था, "फांसी का तख्ता उसका मंडप बना, फांसी का फंदा उसकी वरमाला और मौत उसकी दुल्हन।"

PunjabKesari, bhagat singh hd imageएक समाचार पत्र के संवाददाता ने जब सरदार भगत सिंह के भांजे सरदार जगमोहन सिंह से बातचीत की तो उन्होंने भगत सिंह के जीवन से जुड़ी कई अनसुनी कहानियां बताईं। उन्होंने बताया, "8 साल की उम्र में एक बार सरदार भगत सिंह अपनी छोटी बहन के साथ बैठ कर पढ़ाई कर रहे थे। उस दौरान भगत सिंह कोई किताब पढ़ रहे थे। उसी समय उत्सुकता से छोटी बहन ने उनकी किताब देखने की कोशिश की। तब भगत सिंह ने अपनी 4 साल की बहन के सीने पर जलती लालटेन रख दी, जिससे वह कई जगह झुलस गई। जैसे ही वह चिल्लाई, भगत सिंह ने बहन का मुंह बंद करते हुए कहा कि चिल्लाना नहीं, मैं तो देखना चाहता था कि तुममें कितनी सहन शक्ति है। जब सहन शक्ति होगी, तभी देशभक्ति की राह में आगे चल पाओगी। भगत सिंह से यह बात सुनकर छोटी बहन ने अपनी पीड़ा को सहते हुए चिल्लाना बंद कर दिया।

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मां से रही जीवन भर एक शिकायत
सरदार जगमोहन सिंह ने बताया, "भगत मामा बचपन से ही कसरत के बेहद शौकीन थे। वे लाहौर में हुई लट्ठबाजी प्रतियोगिता के चैम्पियन भी रहे। एक बार वो अपनी मां (मेरी नानी) के साथ तांगे से कहीं जा रहे थे। कुछ दूर चलने के बाद तांगा एक गड्ढे में पलट गया, जिससे मामा के सीने की दो पसलियां दब गईं। उसी की वजह से वे नानी से कहते रहते थे- मैं इतनी कसरत करता हूं, लेकिन मेरा सीना पूरा नहीं फूलता। आपकी वजह से मेरी दो पसलियां दब गईं। आप मुझे लेकर नहीं गई होतीं तो शायद मेरी पसलियां न दबतीं और मेरा सीना पूरा फूलता।"

लोगों को बचाते-बचाते गल गया था पैर
जगमोहन सिंह बताते हैं, "भगत सिंह तैराकी और नौका चलाने के बेहद शौकीन थे। वे कितने भी गहरे पानी में बांस के सहारे चल सकते थे। 1926 में कानपुर में भीषण बाढ़ आई। तब उन्होंने ने बीके दत्त के साथ मिलकर बाढ़ पीड़ितों को बचाने के लिए काफी दिनों तक कम किया था। मेरी मां बताती थीं कि लौटते वक्त उनके पैर का निचला भाग लगातार पानी में रहने के कारण गल गया था।"

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