Edited By Urmila,Updated: 26 Oct, 2026 04:21 PM

पंजाब में धान की कटाई के बाद पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए फिरोजपुर के किसान नसीब सिंह एक मिसाल पेश कर रहे हैं।
फिरोजपुर (सन्नी चोपड़ा): पंजाब में धान की कटाई के बाद पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए फिरोजपुर के किसान नसीब सिंह एक मिसाल पेश कर रहे हैं। नसीब सिंह पिछले तीन सालों से अपने खेतों में पराली नहीं जला रहे, बल्कि बेलर मशीन की मदद से पराली की गांठें बनवाकर खेतों से बाहर निकलवा देते हैं। किसान नसीब सिंह करीब 400 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर अलग-अलग फसलों की खेती करते हैं। पराली प्रबंधन को लेकर किसान और बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाने वाले व्यक्ति से बातचीत की गई।
फिरोजपुर में किसान नसीब सिंह पिछले तीन वर्षों से धान की कटाई के बाद पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन कर रहे हैं। वह बेलर मशीन की मदद से पराली की गांठें बनवाकर खेतों से उठवा देते हैं, ताकि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके। नसीब सिंह करीब 400 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती करते हैं। उनका कहना है कि पराली जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है, इसलिए किसानों को पराली जलाने से बचना चाहिए।

किसान नसीब सिंह ने कहा कि पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है, इसलिए वह पिछले तीन सालों से अपने खेतों में पराली नहीं जला रहे हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ इसका स्थायी और व्यावहारिक समाधान भी उपलब्ध करवाया जाए, ताकि किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

वहीं, पराली की गांठें बनाने वाले व्यक्ति ने बताया कि धान की कटाई के बाद वह बेलर मशीन लेकर खेतों में पहुंचते हैं और पराली की गांठें बनाकर उन्हें खेतों से बाहर निकाल देते हैं। इससे किसानों को पराली के प्रबंधन में मदद मिलती है और खेतों में पराली जलाने की जरूरत कम होती है। फिरोजपुर के किसान नसीब सिंह की यह पहल दिखाती है कि पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन के विकल्प अपनाए जा सकते हैं। जरूरत है कि किसानों को ऐसे विकल्पों के लिए उचित सुविधाएं और सहयोग मिले, ताकि खेती भी जारी रहे और पर्यावरण को भी नुकसान से बचाया जा सके।
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