Edited By swetha,Updated: 16 Mar, 2020 09:51 AM

किसी भी देश, राज्य और शहर के लिए हरा-भरा वातावरण न केवल उसके मौसम पर असर डालता है
जालंधर(खुराना): किसी भी देश, राज्य और शहर के लिए हरा-भरा वातावरण न केवल उसके मौसम पर असर डालता है, बल्कि प्रदूषण को खत्म करने में भी हरियाली काफी सहायक साबित होती है, इसलिए पर्यावरण से संबंधित ज्यादातर कानून हरियाली को संरक्षित रखने में सहायक होते हैं और सरकारें भी अपने तहत आते क्षेत्रों को हरा-भरा रखने का हर सम्भव प्रयास करती रहती हैं।
जालंधर की बात करें तो यहां हरियाली के मामले में न तो निगमाधिकारियों और न ही सत्तापक्ष के नेताओं को ज्यादा ङ्क्षचता है। ऐसे में आम शहरी भी हरियाली के प्रति ज्यादा आकॢषत नहीं होते। अवैध रूप से बसी कालोनियों में तो ग्रीन बैल्टों व पार्कों इत्यादि का प्रावधान रखा ही नहीं जाता। शहर की जिन कालोनियों को सरकारी विभागों ने काटा है, वहां जो भी पार्क व ग्रीन बैल्टें रखी गई हैं, उनमें भी हरियाली ज्यादातर देखने को नहीं मिलती।
इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट द्वारा काटी गई कालोनी सूर्या एंक्लेव की बात करें तो न केवल इसके पार्कों को हरा-भरा बनाकर पूरे क्षेत्र की नुहार बदली जा सकती है, बल्कि ग्रीन बैल्टों में भी डैकोरेटिव प्लांट उगा कर क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाई जा सकती है, परंतु इसकी ओर न तो सरकारों और न ही लोगों का ध्यान है। आज सूर्या एंक्लेव की मेन सड़क, जो अक्षरधाम मंदिर की ओर जाती है, पर बनी ग्रीन बैल्ट में लोगों ने पौधे लगाने की बजाय सब्जियां उगा रखी हैं। इन दिनों उस ग्रीन बैल्ट में हरा प्याज, पालक, मूली आदि उगे हुए देखे जा सकते हैं।यदि क्षेत्र की वैल्फेयर सोसायटी सब्जियों की बजाय आगामी बरसाती सीजन में पौधारोपण करे तो पूरे क्षेत्र को हरी-भरी लुक दी जा सकती है। सब्जियों के लिए लोगों को रूफटॉप गार्डन इत्यादि स्थान सुझाए जा सकते हैं।