अफसरों ने डाला मास्क व ट्रैफिक चालान काटने का दबाव, लोकल थाने के एस.एच.ओज हुए परेशान

Edited By Vaneet,Updated: 24 Jun, 2020 11:17 AM

officers put pressure on cutting masks and traffic challans

कोरोना वायरस के चलते जहां पिछले अढ़ाई महीनों तक चले कफ्र्यू-लॉकडाऊन में व्यापारियों समेत आम आदमी ....

जालंधर(मृदुल): कोरोना वायरस के चलते जहां पिछले अढ़ाई महीनों तक चले कफ्र्यू-लॉकडाऊन में व्यापारियों समेत आम आदमी की आॢथक तौर पर कमर टूट गई है वहीं दूसरी ओर लॉकडाऊन व कफ्र्यू के कारण पंजाब सरकार का खजाना खाली हो चुका है। जिसके चलते सरकार ने पुलिस प्रशासन को सख्ती से रैवेन्यू इकट्ठा करने के आदेश जारी कर दिए हैं। 

हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि पंजाब पुलिस के डी.जी.पी. लैवल के अधिकारियों, आई.जी. व डी.आई.जी. व एस.एस.पी. रैंक के अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि रोजाना स्तर पर लोगों के ट्रैफिक उल्लंघन, थूकने व बिना मास्क के चालान काटकर रैवेन्यू इकट्ठा करवाया जाए ताकि सरकार का खजाना भरा जा सके। वहीं इस फैसले से आखिर में जनता ही पिसेगी क्योंकि उसे जेब से चालान का भुगतान करना होगा।  

जानकारी के अनुसार हर जिले के डी.सी., पुलिस कमिश्नर और एस.एस.पी. को आदेश दिए गए हैं कि प्रतिदिन चालान की ज्यादा से ज्यादा संख्या दर्ज की जाए ताकि मुख्यमंत्री और मंत्रियों की गुड बुक्स में आकर हीरो बना जा सके और सरकार का खजाना भरा जा सके, जो अढ़ाई महीने के लॉकडाऊन कफ्र्यू के कारण खाली हो गया था। चंडीगढ़ स्थित डी.जी.पी. ऑफिस में तैनात एक आई.जी. रैंक के अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि सी.एम. ऑफिस से सख्त तौर पर आदेश जारी हुए हैं कि लोगों के चालान काटकर रैवेन्यू इकट्ठा किया जाए। नाम न बताने की शर्त पर आई.जी. रैंक के अधिकारी ने बताया कि आलम यह है कि लोगों को ट्रैफिक रूल्स के नाम पर ज्यादा से ज्यादा अफैंस काटकर चालान पकड़ाया जाए। अब गौर करने की बात है कि फरवरी महीने में ट्रांसपोर्ट मंत्री द्वारा चालान के जुर्माने की रकम बढ़ा दी गई। जो हैल्मेट का चालान 300 रुपए का था, वहीं उसके लिए अब लोगों को 1000 रुपए भरने पड़ रहे हैं, जिसके कारण लोगों को परेशानी हो रही है। 

हीं जालंधर के पुलिस कमिश्नर दफ्तर के अंदर तैनात एक बड़े अधिकारी ने बताया कि सरकार द्वारा चालान काटने के आदेश आने से बड़े अफसरों का ए.सी.पी. रैंक व एस.एच.ओ. रैंक के अधिकारियों पर ज्यादा दबाव हो गया है क्योंकि अफसरों के आदेशों का लोकल थाना लैवल के ही एस.एच.ओ. व मुलाजिमों को पालन करना होगा। इसलिए एस.एच.ओ. लैवल के अधिकारी इस वक्त काफी दबाव में काम कर रहे हैं क्योंकि अगर पुलिस चालान या पर्चा दर्ज करने लगती है तो राजनीतिक सिफारिश सबसे पहले आ जाती है और उन्हें लोगों को सिफारिशी तौर पर बख्शना पड़ता है। सरकार का अफसरों पर और अफसरों का छोटे मुलाजिमों पर दबाव होने के चलते पुलिस प्रशासन के कई इंस्पैक्टरों व मुलाजिमों में इस बात को लेकर खिलाफत बढ़ रही है। 

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