Edited By Urmila,Updated: 15 Mar, 2026 11:15 AM

पंजाब के Bathinda से सामने आए एक भंगड़ा वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यहां एक भंगड़ा ग्रुप द्वारा पुलिस की वर्दी पहनकर स्टेज पर परफॉर्म करने का मामला चर्चा में है।
पंजाब डेस्क : पंजाब के Bathinda से सामने आए एक भंगड़ा वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यहां एक भंगड़ा ग्रुप द्वारा पुलिस की वर्दी पहनकर स्टेज पर परफॉर्म करने का मामला चर्चा में है। इस पर Animal Welfare Board of India के सदस्य गुरविंदर ने कड़ा एतराज जताया है और इसे वर्दी के सम्मान के खिलाफ बताया है।
सोशल मीडिया पर उठाए सवाल
गुरविंदर ने वीडियो को फेसबुक पर साझा करते हुए सवाल किया कि क्या सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पुलिस की वर्दी, बैज और हथियारनुमा सामान पहनकर डांस करना उचित है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर अगर कोई युवक नकली हथियार के साथ रील बनाता है तो Punjab Police कार्रवाई करती है, ऐसे में स्टेज शो में वर्दी और हथियारों का प्रदर्शन कैसे जायज है।
भंगड़ा ग्रुप का पक्ष
वहीं, भंगड़ा ग्रुप के संचालक विपन ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब फिल्मी एक्ट का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस्तेमाल की गई वर्दी और हथियार दोनों नकली हैं। उन्होंने दलील दी कि यह परफॉर्मेंस Jatt & Juliet से प्रेरित है, जिसमें Diljit Dosanjh ने भी पुलिस की वर्दी पहनी थी। ऐसे में ग्रुप पर सवाल उठाना गलत है। विपन ने कहा कि दिलजीत ने भी तो फिल्म में वर्दी डाल रखी है। अकेले दिलजीत ही नहीं सभी फिल्मी एक्टर वर्दी डालते हैं। गन का भी इस्तेमाल करते हैं। हमने जो गन इस्तेमाल की हैं वो लाइटर गन हैं। एक्ट के लिए ये करना पड़ता है। इसका उद्देश्य किसी को डराना या हथियार कल्चर को बढ़ावा देना नहीं है।
रील्स को लेकर पुलिस तक शिकायत
गुरविंदर का कहना है कि उन्होंने आपत्तिजनक रील्स को बठिंडा पुलिस अधिकारियों को टैग भी किया है। उनका तर्क है कि डांस से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन सुरक्षा बलों की वर्दी का मंचीय मनोरंजन में इस्तेमाल गलत संदेश देता है और इससे संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होती है।
स्टेज शो और एक्ट पर बहस
ब्लैक पैंथर भंगड़ा ग्रुप शादियों और बड़े आयोजनों में भंगड़ा, गिद्दा से लेकर फिल्मी एक्ट तक पेश करता है। इनके शो में Gurdas Maan, Babbu Maan और साउथ स्टार Allu Arjun के किरदारों पर आधारित परफॉर्मेंस भी शामिल हैं। हालांकि, पुलिस वर्दी और हथियारों जैसे प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर अब यह मामला प्रशासनिक और सामाजिक बहस का विषय बनता जा रहा है।
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