4 साल बाद स्कूल लौटी अध्यापिका का हफ्ते भर में फिर पसंदीदा जिले में डेपुटेशन, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

Edited By Kalash,Updated: 22 Jan, 2026 06:13 PM

teacher transfer

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।

नूरपुर बेदी (भंडारी): सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल चनौली बसी की एक कंप्यूटर फैकल्टी अध्यापिका को पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा आदेश जारी कर दोबारा चंडीगढ़ के नजदीक किसी अन्य स्कूल में डेपुटेशन (अस्थायी व्यवस्था) पर भेजे जाने की जानकारी मिलते ही ग्राम पंचायत चनौली, स्कूल प्रबंधन समिति के प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों के अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने एकत्रित होकर स्कूल के गेट के समक्ष पंजाब सरकार व शिक्षा विभाग के खिलाफ जोरदार रोष प्रदर्शन किया। इस मौके ग्रामीणों ने स्कूल की प्रिंसिपल से भी मुलाकात कर उक्त अध्यापिका को रिलीव न करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।

इस मौके मौजूद सरपंच कुलविंदर सिंह, पूर्व सरपंच भूपिंदर सिंह, स्कूल कमेटी की चेयरपर्सन राज कुमारी, गुरविंदर नंबरदार, शिंगारा सिंह, जसवंत सिंह, धर्मिंदर सिंह, कुलदीप काला, अशोक कुमार, रविपाल बसी, अंकू पंडित, कमल ठेकेदार, गुरमेल सिंह और जसवीर जस्सी आदि ने बताया कि स्कूल की एक कंम्प्यूटर फैकल्टी अध्यापिका पिछले 4 वर्षों से एस.ए.एस. नगर (मोहाली) के एक स्कूल में डेपुटेशन पर कार्यरत है।

उन्होंने बताया कि उक्त अध्यापिका के डेपुटेशन पर रहने के कारण वर्तमान में केवल एक ही शिक्षक छठी से बारहवीं कक्षा तक के करीब 250 विद्यार्थियों को कंम्प्यूटर शिक्षा दे रहा है। कई बार उस शिक्षक की ड्यूटी चुनाव या अन्य विभागीय कार्यों में लग जाती है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का काफी नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि मेहनती स्टाफ को देखते हुए ही उन्होंने अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों से हटाकर इस सरकारी स्कूल में दाखिल करवाया था, लेकिन अब धीरे-धीरे अध्यापकों के पद खाली होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

विभाग ने फारिग करने के आदेशों के 2 हफ्ते बाद फिर डेपुटेशन के आदेश जारी किए

ग्रामीणों ने बताया कि डायरैक्टोरेट स्कूल एजुकेशन सैकेंडरी, पंजाब ने 6 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर 31 दिसंबर 2025 तक की सभी अस्थायी तबादलों को रद्द करते हुए अध्यापकों को फारिग कर उनके मूल स्थानों पर भेजने के निर्देश दिए थे। उस समय स्कूलों में शीतकालीन अवकाश चल रहा था। इन आदेशों के दौरान स्कूलों में छुट्टियां चल रही थी।

मगर जब 14 जनवरी को स्कूल खुलने पर उक्त कंम्प्यूटर फैकल्टी अध्यापिका ने स्कूल में ज्वाइन किया, तो एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ था कि 20 को डायरैक्टर स्कूल एजुकेशन सैकेंडरी पंजाब के ट्रांसफर सेल के डिप्टी डायरैक्टर ने आदेश जारी कर उन्हें पुनः सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल बहलोलपुर, एस.ए.एस. नगर में डेपुटेशन पर भेज दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्कूल में उन्हें डेपुटेशन पर भेजा गया है, वहां कंप्यूटर फैकल्टी का कोई पद खाली नहीं है, जो पूरी तरह गलत है।

डेपुटेशन रद्द न होने पर पक्का धरना देने की चेतावनी

ग्रामीणों ने पंजाब सरकार और शिक्षा विभाग को चेतावनी दी कि यदि कंप्यूटर फैकल्टी अध्यापिका का डेपुटेशन रद्द नहीं किया गया तो अभिभावक और विभिन्न गांवों की पंचायतें मिलकर स्कूल के सामने पक्का धरना लगाएंगी। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार स्कूलों में अध्यापक भेजने के दावे कर रही है, जबकि दूसरी ओर खाली पदों को भरा नहीं जा रहा और जो अध्यापक मौजूद हैं, उन्हें डेपुटेशन पर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि डेपुटेशन की बजाय स्थायी तबादले किए जाएं, ताकि खाली पदों पर नए अध्यापक आ सकें।

इस संबंध में जब स्कूल की प्रिंसिपल शरणजीत कौर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूल में कंप्यूटर फैकल्टी के दो पद स्वीकृत हैं, जिनमें से एक अध्यापिका चार वर्षों से डेपुटेशन पर है। उन्होंने कहा कि अध्यापिका ने 14 जनवरी को स्कूल ज्वाइन किया था, लेकिन विभाग ने उनके पुनः डेपुटेशन के आदेश जारी कर दिए हैं। विभागीय आदेशों के अनुसार उन्हें अध्यापिका को रिलीव करना पड़ेगा, जबकि डेपुटेशन के आदेश केवल विभाग के उच्च अधिकारी ही रद्द कर सकते हैं।

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