फिर वही हाल! पंजाब के ये जिले पराली जलाने में सबसे आगे, हैरान कर देंगे आंकड़े

Edited By Kalash,Updated: 02 Nov, 2025 06:22 PM

stubble burning cases

जैसे-जैसे धान की फसल की कटाई खत्म होने के नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे एकदम से पराली को जलाने के मामले में बढ़ते जा रहे हैं।

अमृतसर (नीरज): जैसे-जैसे धान की फसल की कटाई खत्म होने के नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे एकदम से पराली को जलाने के मामले में बढ़ते जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिला अमृतसर में पराली जलाने के मामले एक नवबर के दिन 200 का आंकड़ा पार कर गए, जो आने वाले दिनों में और बढ़ने के पूरे आसार हैं, क्योंकि अभी तक 90 प्रतिशत फसल की कटाई हुई है। वहीं तरनतारन जिला 374 केसों के साथ लगातार पहले नंबर पर बना हुआ है। मुख्यमंत्री का अपना ही जिला 281 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर चल रहा है, जबकि फिरोजपुर जिला इस समय 167 केसों के साथ चौथे नंबर पर है। अमृतसर फिलहाल इस समय तीसरे नंबर पर है। जिला प्रशासन की तरफ से बनाई गई टॉस्क फोर्स के जरिए अभी तक 77 लोगों पर एफ.आई.आर. दर्ज करवाई जा चुकी है, जबकि 82 लोगों की जमीन की रैड एंट्री करवाई गई है।

रात के समय लगाई जाती है पराली को आ

जिस प्रकार से तस्करों की तरफ से रात के समय ड्रोन की मूवमैंट करवाई जाती है, उसी प्रकार से पराली के मामले में भी रात के समय ही कार्रवाई की जाती है। ज्यादातर मामलों मे रात के समय पराली को आग लगाई जाती है, क्योंकि इस समय टॉस्क फोर्स की टीमें गश्त पर नहीं होती है, लेकिन सैटेलाइट से जरिए भेजे गए मैसेज से पता चल जाता है कि किस गांव व किस इलाके में आग लगाई गई है।

जिला प्रशासन व पुलिस के जागरुकता अभियान बेअसर

खेतों में पराली की आग को रोकने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से इस बार काफी जागरुकता अभियान शुरू किए गए, जिसमें किसानों को प्रशंसा पत्र दिए गए पराली को नहीं जलाने वाले किसानों के लिए सरकारी विभागों में पहल के आधार पर काम करने के ऐलान किए गए। इसके अलावा पुलिस की तरफ से भी जागरुकता अभियान चलाए गए, लेकिन इसका यादा असर देखने को नहीं मिल रहा है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पराली जलाने के मामले में और यादा तेज हो सकते हैं।

एक्यूआई अभी भी 121, आंखों में महसूस होती है जलन

पराली व पटाखों से निकले धुंएं के कारण जिले में एक्यूआई अभी भी 121 तक चल रहा है और यैलो अलर्ट पर है। दोपहिया वाहन चलाने वाले आंखों में जलन महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा सुबह व शाम के समय स्मोग छाई रहती है, जो धुंध की भाति प्रतीत होती है, लेकिन यह धुंध नहीं बल्कि प्रदूषण है।

पराली की आग रोकने के लिए पुन: प्रबंधन की जरुरत

पंजाब में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की सरकारें रही हैं और हर पार्टी ने पराली प्रबंधन के लिए बड़े-बड़े ऐलान किए हैं, लेकिन पराली की आग को पूरी तरह से रोकने के लिए पुता प्रबंधन की जरुरत है या तो सरकार अपने स्तर पर धान की पराली को संभाले या फिर किसानों को प्रति एकड़ इतना मुआवजा जारी करे, ताकि किसान पराली को आग नहीं लगाएं।

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