Edited By Kalash,Updated: 12 Feb, 2026 02:56 PM

पिछले साल रावी दरिया में आई बाढ़ के पानी से अजनाला विधानसभा क्षेत्र के करीब 100 गांवों को नुकसान पहुंचा था
अजनाला (बाठ): पिछले साल रावी दरिया में आई बाढ़ के पानी से अजनाला विधानसभा क्षेत्र के करीब 100 गांवों को नुकसान पहुंचा था और हजारों एकड़ धान, गन्ना और दूसरी खेती की फसलें बर्बाद कर दी थी। स्थानीय लोगों ने बाढ़ का कारण यह बताया था कि अजनाला हलके में रावी दरिया से कथित राजसी शह प्राप्त रेत माफिया द्वारा हजारों ट्रक रेत गैर-कानूनी तरीके से निकाले गए थे, जिस कारण रावी दरिया का कुदरती बहाव गुम हो गया था और अवैध माइनिंग के कारण कमजोर हुए धुस्सी बांध को तोड़कर पानी गांवों में तबाही मचाने आ गया था।
इस संबंध में भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि दरिया की डी-सिल्टिंग करने के नाम में विभाग द्वारा लगाए गए कैमरों को बंद करके कथित रेत माफिया द्वारा 200 के करीब गैर-कानूनी तरीके से रेत के लदे हुए टिप्पर घोनेवाल, कस्सोवाल और चाहड़पुर के पास दरिया से निकाले जा रहे हैं। इससे सरकारी खजाने को एक ही दिन में करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें शक है कि इसमें पुलिस प्रशासन के कुछ आला अफसर और माइनिंग डिपार्टमेंट के कुछ अधिकारी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि रेत का पूरा प्रबंध कथित तौर पर राजसी शह प्राप्त लोगों द्वारा चलाया जा रहा हैं और आमतौर पर देखनो को मिला है कि गैर-कानूनी रेत के टिप्पर भरने वाले अड्डों और सियासी शह प्राप्त नुमाइंदें ही काबिज हैं। गांव वाले इन बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह से गैर-कानूनी रेत माइनिंग जारी रही तो आने वाले बरसात के सीजन में फिर बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।
इस बारे में माइनिंग विभाग के एस.डी.ओ. अमृतसर सरबजीत सिंह ने कहा कि उन्हें जुबानी कुछ भी याद नहीं है और सारा रिकॉर्ड ऑफिस में मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि यह ठेकेदार पर निर्भर करता है, वह अपनी मर्जी से दरिया से टिपर में रेत भरकर बाहर किसी भी कीमत पर बेच सकता है, इसका विभाग से कोई संबंध नहीं है।
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