Ludhiana: गवर्नमेंट कॉलेज के ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर बना हादसों का खतरा, खड्डों में सड़कें, गायब मार्किंग और...

Edited By Kamini,Updated: 15 Oct, 2026 10:11 AM

risk of accidents on the driving test track

महानगर के गवर्नमेंट कॉलेज (लड़के) परिसर में स्थापित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट एवं ऑनलाइन लाइसेंस सेंटर इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी और बदहाली का शिकार बना हुआ है।

लुधियाना (राज): महानगर के गवर्नमेंट कॉलेज (लड़के) परिसर में स्थापित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट एवं ऑनलाइन लाइसेंस सेंटर इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी और बदहाली का शिकार बना हुआ है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए शहरभर से पहुंच रहे आवेदकों को अपनी दक्षता साबित करने से पहले ही सेंटर के बदतर बुनियादी ढांचे से जूझना पड़ रहा है। जिस ऑटोमेटेड ट्रैक पर वाहन चालकों की ड्राइविंग क्षमता, संतुलन और तकनीकी बारीकियों की जांच की जाती है, वह ट्रैक खुद बदहाली के आंसू रो रहा है। ट्रैक के बीचों-बीच बने गहरे खड्डे, उगी हुई जंगली घास, गायब होती सफेद मार्किंग और बिखरी हुई बिजली की तारें न केवल टेस्ट देने वालों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं, बल्कि उन्हें फेल कराने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

गायब मार्किंग और जंगली घास के बीच रास्ता तलाश रहे आवेदक

ऑटोमेटेड टेस्ट प्रणाली के नियमों के तहत ट्रैक पर बनी सफेद पट्टियों (मार्किंग) के भीतर ही वाहन को नियंत्रित करना अनिवार्य होता है। जरा-सा पहिया बाहर निकलते ही सेंसर वाहन चालक को टेस्ट में 'फेल' घोषित कर देते हैं। हालात यह हैं कि ट्रैक पर दिशा-निर्देश देने वाली सफेद मार्किंग कई जगहों से पूरी तरह मिट चुकी है। ट्रैक के कई मोड़ों और किनारों पर जंगली घास उग आई है, जिससे निर्धारित ट्रैक की सीमाएं ही नजर नहीं आतीं। टेस्ट देने पहुंचे आवेदकों को वाहन चलाते समय खुद अनुमान लगाकर मार्किंग तलाशनी पड़ रही है। आवेदकों का कहना है कि प्रशासन बेहतर ड्राइविंग की परख करने के बजाय उनसे उबड़-खाबड़ और गड्ढों वाली कच्ची सड़कों पर वाहन चलाने की परीक्षा ले रहा है।

टूटी सड़कें और खुली तारें दे रहीं हादसों को न्योता

ट्रैक पर जगह-जगह सड़क टूटी हुई है और गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिससे अचानक ब्रेक लगाने या स्टीयरिंग मोड़ने पर दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, ट्रैक परिसर में बिजली की नंगी तारें बेतरतीब ढंग से फैली हुई हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा अप्रिय हादसा हो सकता है। टेस्ट देने आए युवाओं का कहना है कि जब सरकार लाइसेंस फीस के रूप में मोटी रकम वसूलती है, तो फिर ट्रैक की नियमित सफाई, मरम्मत और रखरखाव की सुध क्यों नहीं ली जा रही?

15 दिन से टूटी पड़ी है दीवार, खुले में पड़ा लाखों का जनरेटर

लाइसेंस सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था का हाल भी बेहद दयनीय है। परिसर की बाहरी सुरक्षा दीवार का एक बड़ा हिस्सा पिछले करीब 15 दिनों से टूटा पड़ा है, लेकिन उसे ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई गई। दीवार टूटी होने के कारण कोई भी लावारिस पशु या असामाजिक तत्व आसानी से अंदर दाखिल हो सकता है। इसी असुरक्षित हिस्से के पास लाखों रुपये की कीमत का जनरेटर खुले आसमान के नीचे लावारिस हालत में रखा हुआ है। गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले ही डीसी कार्यालय परिसर के पास से चोर जनरेटर उड़ा ले गए थे। उस घटना से सबक लेने के बजाय ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है। इसके साथ ही सेंटर के शौचालय (बाथरूम) भी बेहद गंदगी और बदहाली की मार झेल रहे हैं।

1.50 करोड़ का एस्टीमेट तैयार, जल्द शुरू होगा काम: RTO चाहल

ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की खस्ताहाली और सुरक्षा संबंधी खामियों पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) मनकंवल सिंह चाहल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि विभाग ट्रैक की समस्याओं, टूटी दीवारों, पंखों और शौचालयों की स्थिति से पूरी तरह अवगत है। आरटीओ ने कहा कि सेंटर के संपूर्ण जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए करीब 1.50 करोड़ रुपये का विस्तृत एस्टीमेट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही जरूरी फंड जारी कर दिए जाएंगे। फंड आवंटन के उपरांत टेंडर प्रक्रिया मुकम्मल कर ट्रैक की री-कारपेटिंग, मार्किंग और सुरक्षा मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू करवाया जाएगा ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!