Edited By Kalash,Updated: 25 Oct, 2026 04:58 PM

अक्टूबर के महीने में शनिवार को हुई बेमौसमी बारिश के बाद अमृतसर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है।
अमृतसर (दलजीत): अक्टूबर के महीने में शनिवार को हुई बेमौसमी बारिश के बाद अमृतसर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। बारिश के साथ चली ठंडी हवाओं ने वातावरण में ठंडक बढ़ा दी है। गर्मी से राहत देने वाला यह सुहावना मौसम अब उन लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, जो पहले से दमा, सांस की एलर्जी या छाती संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। मौसम में आए इस बदलाव के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीजों को ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचने तथा स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
जानकारी अनुसार तेज हवाओं के बाद बारिश के बाद तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं के कारण कुछ लोगों में खांसी, जुकाम, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है। दमा के मरीजों को सीने में जकड़न, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज और रात के समय खांसी की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा वायरल संक्रमण के कारण भी श्वसन संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, हर खांसी या जुकाम का कारण ठंड नहीं होता, इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों की चिकित्सकीय जांच करवाना जरूरी है।
बारिश के बाद बदला मौसम, दमा के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
ठंडी हवा कुछ संवेदनशील लोगों की सांस की नलियों में सिकुड़न पैदा कर सकती है। इससे दमा और पुरानी सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। वातावरण में नमी, धूल, धुएं और फफूंद जैसे तत्व भी कुछ लोगों में एलर्जी के लक्षण बढ़ा सकते हैं। मौसम में अचानक बदलाव के दौरान सुबह और शाम के समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर निकलते समय मौसम के अनुरूप गर्म कपड़े पहनें और धूल, धुएं तथा प्रदूषण से बचें। जिन मरीजों को पहले से सांस की बीमारी है, वे चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाइयां नियमित रूप से लेते रहें। बिना सलाह के इनहेलर या दवाइयां बंद करना परेशानी बढ़ा सकता है।
लगातार खांसी, बुखार और सांस फूलने को न समझें मामूली
मौसम बदलने के दौरान होने वाली खांसी और जुकाम को कई लोग सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यदि खांसी लगातार बनी रहे, तेज बुखार हो, सीने में दर्द या जकड़न महसूस हो अथवा सांस लेने में कठिनाई होने लगे तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है। बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयों का सेवन न करें। पर्याप्त आराम, संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
ठंडी हवाओं में सांस के मरीज बरतें विशेष सावधानी
स्वास्थ्य विभाग के पूर्व जिला टीबी अधिकारी डॉ. नरेश चावला ने कहा कि बारिश के बाद ठंड बढ़ने और मौसम में अचानक बदलाव से कुछ सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। दमा तथा सांस की पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपनी दवाइयां नियमित रूप से लेनी चाहिए। ठंडी हवा, धूल और धुएं से बचाव रखें। यदि सांस फूलने, सीने में जकड़न या लगातार खांसी की शिकायत हो तो समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर रखें नजर
डॉ. रजनीश शर्मा ने कहा कि मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बारिश के बाद ठंड बढ़ने पर उन्हें मौसम के अनुरूप कपड़े पहनाएं और लंबे समय तक ठंडी हवा में रहने से बचाएं। यदि खांसी के साथ बुखार, कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो तो लापरवाही करने के बजाय चिकित्सकीय जांच करवाएं।
खुद से दवाइयां लेने के बजाय डॉक्टर से लें सलाह
सरकारी मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर डॉक्टर निर्मल चंद काजल ने कहा कि मौसम बदलने पर होने वाली खांसी और जुकाम को हल्के में नहीं लेना चाहिए, विशेषकर जब लक्षण लगातार बने रहें। हर खांसी में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने से बचें। समय पर जांच और उचित उपचार से बीमारी की गंभीरता बढ़ने से रोका जा सकता है।
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